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चौपाल: शिक्षक और सवाल

वर्तमान में स्कूलों को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है। यहां पर सभी छात्र एक समान हैं चाहे हिंदू होंं या मुसलिम या फिर और अन्य किसी जाति-धर्म के। शिक्षक का कर्तव्य है कि सभी बच्चों को एक ही नजरिए से देखें। हमें बचपन से ही सिखाया जाता है कि जब कक्षा में अध्यापक प्रवेश करें, तभी सभी छात्र एक साथ उठ कर नमस्ते कह कर अभिवादन करें।

Author December 19, 2018 4:12 AM
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर (Express photo by Jaipal Singh)

वर्तमान में स्कूलों को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है। यहां पर सभी छात्र एक समान हैं चाहे हिंदू होंं या मुसलिम या फिर और अन्य किसी जाति-धर्म के। शिक्षक का कर्तव्य है कि सभी बच्चों को एक ही नजरिए से देखें। हमें बचपन से ही सिखाया जाता है कि जब कक्षा में अध्यापक प्रवेश करें, तभी सभी छात्र एक साथ उठ कर नमस्ते कह कर अभिवादन करें। लेकिन, गुड मॉर्निंग बोलने पर शिक्षक जब छात्रों पर अपना गुस्सा जाहिर करता है और अपने धर्म के अनुसार अस्सलामअलैकुम से अभिवादन करने को कहता है तब छात्र अपने आप को अधिक असहज इसलिए महसूस करते हैं क्योंकि छात्रों को पहले से ऐसा बोलना कभी सिखाया ही नहीं गया होता। हालांकि, अगर यह शब्द बचपन से सिखाया भी गया होता तो भी छात्र इस शब्द को आसानी से बोल नहीं पाते। क्योंकि इस शब्द को बोलने में काफी परेशानी होती है और यह शब्द हमारी आम बोलचाल की भाषा में शामिल नहीं होता। पर, शिक्षा के मंदिर में एक शिक्षक ने अपने धर्म को आगे रख छात्रों पर इस शब्द को बोलने का दबाव बनाया। अगर, वह इस शब्द को नहीं बोलते थे तो शिक्षक छात्रों को बेरहमी से मारा करता था। पर, सवाल यह उठता है कि जिस शिक्षक को आने वाली पीढ़ी को सही राह पर चलने के लिए प्रेरित करना चाहिए, आज वहीं शिक्षक अपने धर्म को आगे रख छात्रों को सिर्फ गलत राह पर नहीं ले जा रहा है बल्कि वह उन्हें ऐसे शब्द सिखा कर दो समुदाय में भेदभाव करने को कोशिश भी कर रहा है। ऐसा करने से न सिर्फ उन छात्रों का भविष्य खराब होगा, बल्कि वे अध्यापकों का सम्मान करना भी भूल जाएंगे।
’श्री कृष्ण, गाजियाबाद

जाम के शहर
आज समय का प्रबंधन बहुत महत्त्वपूर्ण हो गया है। लेकिन आज जिस कदर सड़कों पर यातायात बढ़ रहा है और ज्यादातर लोग जाम की समस्या से जूझ रहे हैं उससे उनका वक्त बर्बाद हो रहा है। निजी वाहनों से केवल ट्रैफिक जाम ही नहीं, बल्कि प्रदूषण भी बढ़ रहा है। इससे वाहन मालिकों को आर्थिक हानि भी हो रही है, क्योंकि उन्हें उतनी ही दूरी तय करने के लिए अधिक र्इंधन खर्च करना पड़ेगा। यातायात जाम होने से लोग मानसिक रूप से परेशान और चिड़चिड़े भी हो जाते हैं जिसका प्रभाव उनके स्वास्थ पर पड़ता है। ट्रैफिक जाम से देश की अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ रहा है। सरकारों को चाहिए कि इस समस्या से निजात पाने के लिए ठोस कदम उठाएं और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में बढ़ें।
’चांद मोहम्मद, दिल्ली विश्वविद्यालय

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