ताज़ा खबर
 

चौपाल: आखिर न्याय

चौंतीस साल बाद सिख विरोधी दंगों के एक मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को उम्र कैद की सजा हुई है। हाई कोर्ट ने यह सजा अस्सी साल की एक वृद्धा की गवाही के आधार पर सुनाई है। इस बुजुर्ग महिला ने करोड़ों के प्रलोभन और मौत की धमकियों को नकारते हुए अपनों के साथ हुए इस उस बर्बर हादसे पर अपना बयान कायम रखा। आखिरकार उसके गुनहगार को सजा मिली। लेकिन एक अहम सवाल यह है कि सजा मिलने में करीब साढ़े तीन दशक का समय क्या हमारी न्याय व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल नहीं है?

Author December 19, 2018 4:12 AM
1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों की तस्वीर। (EXPRESS ARCHIVE PHOTO)

चौंतीस साल बाद सिख विरोधी दंगों के एक मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को उम्र कैद की सजा हुई है। हाई कोर्ट ने यह सजा अस्सी साल की एक वृद्धा की गवाही के आधार पर सुनाई है। इस बुजुर्ग महिला ने करोड़ों के प्रलोभन और मौत की धमकियों को नकारते हुए अपनों के साथ हुए इस उस बर्बर हादसे पर अपना बयान कायम रखा। आखिरकार उसके गुनहगार को सजा मिली। लेकिन एक अहम सवाल यह है कि सजा मिलने में करीब साढ़े तीन दशक का समय क्या हमारी न्याय व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल नहीं है?

इस बात में कोई भी दो राय नहीं है कि कानून से कोई बच नहीं सकता है। लेकिन कानून द्वारा सजा मिलने में लगने वाला समय पीड़ित परिजनों के लिए कितना दुखदाई और कठिन होता होगा, यह भी विचारणीय है। सन 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सुरक्षाकर्मियों द्वारा हत्या के बाद देशभर में सिखों के खिलाफ हिंसा और आगजनी हुई थी। बाद में इन मामलों में एफआइआर दर्ज हुर्इं और मुकदमे चलके रहे। जांच का सिलसिला भी जारी था। एक के बाद एक जांच आयोग बनाए गए।

जाहिर है, जब इतने सारे जांच आयोग बने तो जांच में देरी स्वभाविक थी। पीड़ितों का इंतजार दिन, महीने, साल के हिसाब से लंबा होता गया। यह लंबा इंतजार भी न्याय की आस लगाए ऐसे पीड़ित परिवारों के लिए किसी त्रासदी से कम नहीं होता जिनकी हर सुबह न्याय की आस में होती है और हर रात निराशा की गोद में। दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है। बस इतना और हो जाए कि ऐसे भी भीभत्य कांड पर फैसले जल्दी आ सकें। यह देश में न्याय व्यवस्था के प्रति लोगों के सुदृण विश्वास को और मजबूत करने का काम करेगा। अदालतों में करोड़ों की तादाद में मुकदमे लंबित है न्यायिक अधिकारियों की कमी है ऐसे में जल्द नया स्वप्न सरीखा ही लगता है। लेकिन इस दिशा में काम किया जाना बहुत जरूरी है।
’अमन सिंह, बरेली

एक अदद फैसला
सिख विरोधी दंगे के आरोपियों को सजा सुना कर दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘देर आए दुरुस्त आए’ वाली कहावत चरितार्थ करते हुए चौंतीस साल से रुके हुए एक फैसले को अंजाम देकर सिक्खों के दिलों को जीता है। जिस फैसले को कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों ने लंबे समय तक अपने और अपने वालों के स्वार्थ के खातिर लटकाए और अटकाए रखा था, उसे कोर्ट ने एक झटके में सुनवाई करके आरोपी सज्जन कुमार को उम्रकैद के साथ ही अन्य चार को भी सजा सुना दी। इस फैसले से न केवल दंगा पीड़ितों, बल्कि पूरे सिख समुदाय को सुकून और शांति मिली है। पंजाब के मुख्यमंत्री ने भले कांग्रेस का बचाव किया हो, फिर भी कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। यह अच्छी बात है कि उन्होंने सच का साथ भी दिया है।
’शकुंतला महेश नेनावा, इंदौर

खतरे में गंगा
गंगा नदी में बढ़ता प्रदूषण पिछले कई सालों से भारत सरकार और जनता के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। ऋषिकेश से लेकर कोलकाता तक गंगा के किनारे बिजलीघरों से लेकर रासायनिक खाद तक के कारखाने लगे हैं। गंगा का पानी इतना गंदा हो चुका है कि उसमें डुबकी लगाना तो दूर, वहां खड़े होकर सांस लेना तक दूभर हो जाता है। गंगा की सफाई के लिए भले मिशन और कार्यक्रम चल रहे हों, पर बिहार पुलिस द्वारा मई में एक हजार लीटर से ज्यादा शराब कथित तौर पर गंगा में बहा दी गई थी। इस नदी की सफाई के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद कोई संतोषजनक नतीजे देखने को नहीं मिले हैं। अगर इस नदी से सीवेज, कारखानों से निकलने वाले पानी को न रोका गया तो गंगा के अस्तित्व और खतरे में पड़ जाएगा।
’दीपक पटेल, बलौदा बाजार

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App