ताज़ा खबर
 

चौपालः शहीद का नाम

अबुल मुजफ्फ़र मुहिउद्दीन मुहम्मद औरंगजेब आलमगीर के बारे में बहुत कुछ पढ़ने-सुनने को मिलता है। शासक को सभी पसंद करें, यह कहीं भी किसी भी देश में कभी नहीं हुआ।

Author June 18, 2018 4:49 AM
औरंगजेब रोड अब एपीजे अब्दुल कलाम रोड के नाम से जानी जाएगी। नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएसमी) ने शुक्रवार को इस नाम-बदलाव को अपनी मंजूरी दे दी।

अबुल मुजफ्फ़र मुहिउद्दीन मुहम्मद औरंगजेब आलमगीर के बारे में बहुत कुछ पढ़ने-सुनने को मिलता है। शासक को सभी पसंद करें, यह कहीं भी किसी भी देश में कभी नहीं हुआ। इतिहास लिखने वाले सभी के साथ न्याय कर पाएं, ऐसा भी नामुमकिन है। खैर, औरंगजेब आलमगीर को अधिकतर भारतीय लोग एक ऐसा शासक मानते आए हैं, जिसने अपनी प्रजा को हिंदू-मुसलमान के नजरिए से देखा। लगभग तीन सौ वर्ष से कुछ अधिक पहले इस देश में औरंगजेब का शासन रहा, इसलिए इस शख्सियत के बारे में पूरा सच जानना या बताना नामुमकिन है।

बहरहाल, इसी नाम को भारतीय इतिहास के स्वर्णिम पृष्ठों में अभी चौदह जून को दर्ज कर गया वह चौबीस वर्षीय दूसरा औरंगजेब जो 4 जम्मू एंड कश्मीर लाइट इन्फैंट्री का बहादुर सिपाही था और इन दिनों 44 राष्ट्रीय राइफल्स कैंप में दक्षिण कश्मीर में शोपियां में तैनात था। ईद मनाने के लिए अपने घर जाते समय इस बहादुर नौजवान को उन आतंकवादियों ने गोलियों से छलनी करके मौत के घाट उतार दिया, जिनके आका आज भी जम्मू और कश्मीर को हिंदू-मुसलमान के चश्मे से देखते हैं। उम्मीद है इस औरंगजेब की शहादत को देखते हुए सरकार किसी सड़क का नाम ‘औरंगजेब मार्ग’ रखने पर विचार करेगी। याद रहे इस देश के ‘आम औरंगजेब’ अपने इस मुल्क के लिए निरंतर इसी तरह से वक्त जरूरत अपनी कुर्बानी देते रहेंगे। शासकों का क्या, वे तो सत्ता पर पकड़ बनाए रखने के लिए हमेशा से गलत रास्ते अख्तियार करते आए हैं।

सुभाष चंद्र लखेड़ा, द्वारका, नई दिल्ली

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App