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चौपालः असुविधा की रेल

दुनिया की सबसे बड़ी मानी जानी वाली भारतीय रेल देश की परिवहन प्रणाली की रीढ़ है। लेकिन रेलवे की अनगिनत समस्याओं से न सिर्फ यात्रा, बल्कि यात्रा से पहले की तमाम कोशिशें काफी जटिल हैं।

Author Published on: June 18, 2018 4:50 AM
भारतीय रेल। (चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।)

दुनिया की सबसे बड़ी मानी जानी वाली भारतीय रेल देश की परिवहन प्रणाली की रीढ़ है। लेकिन रेलवे की अनगिनत समस्याओं से न सिर्फ यात्रा, बल्कि यात्रा से पहले की तमाम कोशिशें काफी जटिल हैं। आज हम देख सकते हैं कि रेल की हालत कुछ इस तरह है कि सामान्य कोच में जहां खड़े होने की भी जगह नहीं मिलती, वही सभी ट्रेनों में लगभग आधी से ज्यादा कोच स्लीपर क्लास और वातानुकूलित के होते हैं। न तो इसका बुनियादी ढांचा मजबूत हो रहा है और न ही घोषणाओं को सही तरीके से लागू किया जा रहा है। भारतीय रेल के लिए जिस तरह की तकनीकी उन्नति अनिवार्य हो गई है, वह नहीं हो पा रही है। बहुत से स्टेशनों पर पानी पीने लायक नहीं होता। स्टेशनों पर वेंडर मनमाने ढंग से यात्रियों से घटिया सामान के बदले पूरे पैसे वसूल रहे हैं।

जरूरत इस बात की है कि सामान्य डिब्बे की संख्या बढ़ायी जाए, ताकि गरीब आदमी भी आसानी से यात्रा कर सके। ट्रेन में टीटीई की बदसूलकी भी बहुत देखने को मिलती है। मनमाने ढंग से यात्रियों से पैसे वसूले जाते हैं। सेवाओं का घटिया स्तर हैरान करता है। रेलवे एक तरफ यह वादा करती है कि अब यात्री को रिजर्व सीट मिलेगी। रिजर्व सीट नहीं मिलने पर दूसरे ट्रेन में रिजर्व सीट उपलब्ध कराया जाएगा। लेकिन वास्तव में यह सिर्फ दावा ही है, व्यवहार में शायद ही कहीं यह सुविधा मिल पाती है। ट्रेन में सबसे बड़ी समस्या सुरक्षा को लेकर है। लूटपाट या चोरी की घटनाओं के अलावा हादसों में बड़ी तादाद में लोगों की मृत्यु होती है, जिसका किसी के पास उचित जवाब नहीं होता। हर बार किसी बड़े हादसे के बाद कुछ कर्मचारियों पर इसकी जिम्मेदारी डाल कर पूरे मामले को दबा दिया जाता है। हादसों की मूल वजहों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता।

आजकल तो ट्रेनों के लेट होने और सामान्य डिब्बे में कौन कहे, आरक्षित सीटें तक नहीं मिलने की स्थिति ने ट्रेन से सफर को बेहद परेशान करने वाला बना दिया है। ट्रेनों के परिचालन में सुविधा के सफर और सुरक्षा के उच्च स्तर को सुनिश्चित करने के लिए रेलवे को सदैव चौकस रहना होगा और यात्रियों में विश्वास की भावना नए सिरे से जगानी होगी।

संतोष कुमार, बाबा फरीद कॉलेज, बठिंडा

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