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चौपालः प्रदूषण की मार

पर्यावरण को सबसे ज्यादा प्रदूषित विकसित देशों ने किया, लेकिन वे इसका दोष विकासशील देशों पर मढ़ते हैं।

Author June 6, 2018 4:11 AM
वायु प्रदूषण

आज समूचे विश्व में प्रदूषण की समस्या जानलेवा स्तर तक बढ़ती जा रही है और सच कहें तो इसके हल के लिए लिए कोई गंभीर नहीं दिखता है। इस बार पर्यावरण दिवस के केंद्र में ‘प्लास्टिक प्रदूषण’ था। यों तो सभी तरह के प्रदूषण हमारे जीवन के लिए खतरा हैं, लेकिन प्लास्टिक से होने वाला प्रदूषण ज्यादा खतरनाक है। यह एक ऐसा तत्त्व है जो मिट्टी में मिल कर भी खत्म नहीं होता। इसे खत्म होने में हजारों साल लग सकते हैं। शहरों से चलते हुए अब यह हमारे गांवों और समूचे पारिस्थितिकी तंत्र को भी चपेट में ले रहा है। हमारे वन, नदियों, पानी, मिट्टी, हवा को यह प्रदूषित कर रहा है।

विश्व के कई देशों ने अपने यहां प्लास्टिक के प्रयोग को बंद कर दिया है और इसकी बाबत सख्त कानून भी बनाया है। पिछले साल इटली यूरोप का पहला ऐसा देश बन गया, जहां प्लास्टिक पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया। चीन, दक्षिण कोरिया, केन्या, ताइवान और बांग्लादेश समेत कई देशों में पतले प्लास्टिक बैग पर प्रतिबंध है और आयरलैंड जैसे अन्य देश में प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल करने पर भारी कर लगा दिया गया है। कानून और प्रतिबंध तो हमारे देश में भी है। हाल ही में राजधानी दिल्ली में प्लास्टिक की पन्नियों पर प्रतिबंध लगाया गया था। लेकिन थोड़े समय तक सब जागरूक रहे, अब फिर वही हाल हो गया है।

जबकि एक बड़ी घटना यह हुई कि हाल ही में तमिलनाडु में एक फैक्ट्री से जानलेवा प्रदूषण के विरोध में लोगों ने व्यापक विरोध जताया और पुलिस की गोलियों से कई लोगों की जान चली गई। दूसरी तरफ, सरकार ने 2019 तक भारत को स्वच्छ बनाने का वादा किया था, वह अधर में है। आज इसके लिए आवाज नहीं उठाई गई तो वह दिन दूर नहीं, जब प्रदूषण की वजह से हमारी मृत्यु होगी। हमारे ग्लेशियर पिघल रहे हैं, नदियां सूख रही हैं, घाट प्रदूषित होते जा रहे हैं। भारत में कई ऐसे राज्य हैं, जहां पानी का संकट खड़ा हो गया है। शिमला में पानी के अभाव ने चतुर्दिक चिंता पैदा की, क्योंकि जिसे पहाड़ों की रानी कहा जाता है, अगर वहां यह हाल है तो बाकी के बारे में हम अंदाजा लगा सकते हैं।

पर्यावरण को सबसे ज्यादा प्रदूषित विकसित देशों ने किया, लेकिन वे इसका दोष विकासशील देशों पर मढ़ते हैं। जबकि पर्यावरण स्वच्छ बनाने में सबसे ज्यादा जिम्मेदारी विकसित देशों की होनी चाहिए। आज हम सबको मिल कर ऐसी चीजों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाना होगा, जिसके कारण प्रदूषण फैलता है। सरकार को इसके लिए ठोस कदम उठाने होंगे और कानून का उल्लंघन करने वाले को कड़ी सजा देने का प्रावधान करना

आशीष, रामलाल आनंद कॉलेज, दिल्ली

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