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चौपालः हादसे का सबक

उत्तराखंड के पौड़ी जिले की धूमाकोट तहसील में पहली जुलाई को हुए भीषण बस हादसे में 48 यात्रियों की जान चली गई और 10 यात्री घायल हुए हैं।

Author July 4, 2018 04:23 am
लापरवाही का दूसरा पक्ष देखें तो 28 यात्रियों की क्षमता वाली उस बस में 60 यात्री खतरनाक पहाड़ी मार्ग पर बेरोकटोक यात्रा कर रहे थे।

उत्तराखंड के पौड़ी जिले की धूमाकोट तहसील में पहली जुलाई को हुए भीषण बस हादसे में 48 यात्रियों की जान चली गई और 10 यात्री घायल हुए हैं। जब भी इस तरह की दुर्घटना होती है तब मीडिया, जनता और सरकार में खूब हलचल मचती है, लेकिन ज्यों-ज्यों समय बीतता है हम सब कुछ भूल कर मानो अगली दुर्घटना का इंतजार कर रहे होते हैं। मोटे तौर पर देखा जाए तो सड़क दुर्घटना के लिए तीन कारक- सड़क, वाहन और ड्राइवर- जिम्मेदार होते हैं। भारतीय समाज और सरकारों के अंदर सुरक्षित यातायात के प्रति इच्छा-शक्ति का अभाव साफ झलकता है। धूमाकोट तहसील में जो बस दुर्घटना का शिकार हुई, उसका एक कारण सड़क पर बड़ा गड्ढा होना बताया जा रहा है, जिससे बचने के लिए वाहन चालक ने किनारे से निकलने की कोशिश की, लेकिन बस अनियंत्रित होकर सौ मीटर गहरी खाई में जा गिरी। उत्तराखंड में सड़कों की मरम्मत और उन्हें चौड़ा करने का काम युद्ध-स्तर पर चल रहा है। अधूरे निर्माण के कारण तोड़-फोड़, गड्ढे, सड़क पर जमा मलबा, धूल की घनी परत इत्यादि के चलते ये सड़कें असुरक्षित व खतरनाक हो गई हैं। इसके अलावा डामरीकरण घटिया होने तथा वाहनों की निरंतर बढ़ रही संख्या के दबाव के कारण सड़कें जल्दी खराब हो जा रही हैं।

लापरवाही का दूसरा पक्ष देखें तो 28 यात्रियों की क्षमता वाली उस बस में 60 यात्री खतरनाक पहाड़ी मार्ग पर बेरोकटोक यात्रा कर रहे थे। वाहन चालक ने सूझबूझ दिखाई होती तो गड्ढा दिखने पर बस की गति धीमी करके बिना किसी नुकसान के गड्ढा पार हो सकता था। भारत में ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने की प्रक्रिया सिद्धांत रूप में बहुत अच्छी है, लेकिन व्यवहार में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में दलालों को रुपया देकर बिना किसी प्रशिक्षण/टैस्ट में पास हुए ड्राइविंग लाइसेंस मिल जाता है। वाहन चलाने के दौरान मोबाइल के उपयोग की मनाही है, लेकिन इसका कितना अमल होता है! इसके अलावा लंबी दूरी की बसों में अक्सर चालक व परिचालक को आपस में गपशप करते देखा जा सकता है। इस तरह के हादसों की जिम्मेदारी जिन पर है क्या उन्हें सजा मिली? हर दुर्घटना की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश होते हैं, लेकिन यह पता नहीं चलता कि जांच में क्या निकला और दोषी के विरुद्ध क्या कार्रवाई हुई। यह सवाल महत्त्वपूर्ण है। दुर्भाग्य से हमारी सरकारें भी नागरिकों के जीवन को सुरक्षित करने में कम और हादसों के शिकार लोगों को राहत/ मुआवजा बांटने में ज्यादा रुचि लेती हैं।

कमल जोशी, अल्मोड़ा, उत्तराखंड

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