ताज़ा खबर
 

चौपालः शिक्षा की पहुंच

भारत में निजीकरण होने से शिक्षा प्रणाली में काफी बदलाव आया है। इस बदलाव ने अपने अंदर काफी कुछ समेटा हुआ है। आज निजी स्कूल इस कदर स्वतंत्र हो गए कि अपने कर्तव्यों को भूल गए हैं।

Author September 10, 2018 7:17 AM
बेरोजगारी की वजह से शिक्षकों को ढाई, तीन या चार हजार रुपए महीने में पढ़ाने को मजबूर किया जा रहा है।

शिक्षा की पहुंच

भारत में निजीकरण होने से शिक्षा प्रणाली में काफी बदलाव आया है। इस बदलाव ने अपने अंदर काफी कुछ समेटा हुआ है। आज निजी स्कूल इस कदर स्वतंत्र हो गए कि अपने कर्तव्यों को भूल गए हैं। इसने शिक्षा प्रणाली को व्यापार में बदल कर रख दिया है। इस बीच लालच जैसी बीमारी ने जन्म ले लिया जिसकी वजह से लोगों ने मनमाने ढंग से बनाए गए नियमों को लागू किया। आज इन नियमों की चपेट में गरीब बच्चे आ गए हैं जो फीस देने में असमर्थ हैं। माना कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा के अवसर लोगों के पास हैं। लेकिन सरकारी शिक्षा तंत्र तो खुद चौपट हाल में है जिसकी वजह से निजी क्षेत्र की शिक्षा सरकारी शिक्षा पर हावी है। बेरोजगारी की वजह से शिक्षकों को ढाई, तीन या चार हजार रुपए महीने में पढ़ाने को मजबूर किया जा रहा है।

शादमा मुस्कान, दिल्ली

अवैध के जिम्मेदार

रोजी-रोटी की तलाश में गांवों से शहरों की ओर लोगों का पलायन, बढ़ती आबादी और परिवारों के टूटने के कारण शहरी इलाकों में लोगों को रिहाइश की समस्या से जूझना पड़ रहा है। इसके कारण शहरों के आसपास के खाली क्षेत्रों या खेतों में कंक्रीट के जंगल खड़े किए जा रहे हैं। दिन-प्रतिदिन इस बेतरतीब विस्तार के कारण देश के बहुत से शहरों में अवैध कोलोनियों का मुद्दा सुर्खियों में छाया रहता है। सरकारें इन कोलोनियों के बाशिंदों को मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने में नाकाम रहती हैं।
लेकिन सरकार संबंधित विभाग के उन अफसरों पर कठोर कार्रवाई क्यों नहीं करती, जिनकी निगरानी में यह अवैध कोलोनियां खड़ी हो रही हैं। या फिर यह समझा जाए की भ्रष्ट अफसरों और सताधारियों के बीच इस मामले में सांठगांठ होती है। लगता है अवैध कोलोनियों की बीमारी का इलाज सरकारें नहीं कर सकतीं। इसलिए आम आदमी अदालत की शरण में जाने को मजबूर होता है।

राजेश कुमार चौहान, जालंधर

महंगा सफर

एक साल पहले रेल मंत्रालय ने तत्काल कोटे से आरक्षण की सीटें भर जाने के बाद प्रीमियम तत्काल सेवा सितंबर 2016 से शुरू की थी। प्रीमियम तत्काल का किराया ही फ्लेक्सी किराया है। प्रीमियम तत्काल के तहत जितनी सीटें कम होती जाएंगी, उतना किराया बढ़ता जाएगा। विशेषकर राजधानी, शताब्दी, दूरंतो एक्सप्रेस और हमसफर जैसी तेज रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों में फ्लेक्सी किराया प्रणाली को लागू किया गया है। प्रीमियम तत्काल अचानक पैदा हुई परिस्थितियों में काफी फायदेमंद है, मगर गरीब तबके के लिए फ्लेक्सी किराया चुकाना मुश्किल है।

इसी कारण रेल यात्रियों की संख्या में काफी तेज गिरावट देखने को मिली है। सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक रेल का फ्लेक्सी किराया हवाई यात्रा से भी महंगा होता जा रहा है। ऐसे में फ्लेक्सी किराए से मात्र रेलवे की आमदनी में भारी इजाफा हो रहा है। रेलवे को गरीब-वर्ग को ध्यान में रख कर फ्लेक्सी किराया पद्धति पर फिर से विचार करना चाहिए, ताकि सभी वर्गों का एक समान ध्यान रखा जाए।

कशिश वर्मा, कृष्णा नगर, दिल्ली

उम्मीद का मैदान

भारत के कई खिलाड़ियों ने एशियाई खेलों की पदक तालिका में कई पद जीत कर सुनहरे अक्षरों में अपना नाम दर्ज कराया है। इसके अंतिम दिन भारत ने बॉक्सिंग और ब्रिज में स्वर्ण पदक और हॉकी में कांस्य पदक जीत कर कीर्तिमान रचा। भारतीय मुक्केबाज अमित पंघल ने सड़सठ साल बाद स्वर्ण पदक जीत कर यह साबित कर दिया की भारत किसी से पीछे नही है। अमित पहली बार ही एशियाई खेलों में शामिल हुए थे और अपनी धाक जमा दी। भारत ने कई सालों का रिकॉर्ड तोड़ा।

सुनाक्षी, बीआर आंबेडकर कॉलेज, दिल्ली

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App