विकास की दर

इस बार विकास दर में अनुमान से ज्यादा इजाफा हुआ है। अनुमान जीडीपी के 7 से 8 फीसद पर रहने का था, मगर इस बार 8 फीसद से भी ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।

सांकेतिक फोटो।

इस बार विकास दर में अनुमान से ज्यादा इजाफा हुआ है। अनुमान जीडीपी के 7 से 8 फीसद पर रहने का था, मगर इस बार 8 फीसद से भी ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर महंगाई नियंत्रण में रही और नए बहुरूप का असर अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ा, तो जीडीपी में दस फीसद या उससे भी ज्यादा की वृद्धि हो सकती है। जिस तरह त्योहारी मौसम में लोगों की खरीदारी बढ़ी, उससे विकास दर में बढ़ोतरी हुई है। अगर इसी तरह विकास दर बनी रही, तो नए रोजगार की संभावना है। इसीलिए अक्तूबर से दिसंबर तक की तिमाही को महत्त्व दिया जा रहा है।
अर्थशास्त्री अदिति नायरा का कहना है कि इसमें बिल्कुल संदेह नहीं कि अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर लौट आई है। प्रमुख क्षेत्रों के उत्पादन में तेजी इसका प्रमाण है।
’क्षमा, फरीदाबाद, हरियाणा

पाबंदी के बावजूद

बिहार में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समय-समय पर संकेत भी देते रहे हैं कि शराबबंदी कानून का उल्लंघन किसी भी कीमत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बिहार पुलिस शराब माफिया पर लंबे समय से नकेल कसने में लगी हुई है। उन पर विभिन्न प्रकार की कार्रवाई भी की जाती है। मगर जिस प्रकार बिहार विधानसभा परिसर में शराब की खाली बोतलें मिलीं, उससे यही संकेत मिलता है कि वहां अब भी शराब माफिया सक्रिय है। इस पर स्वाभाविक ही विपक्ष सरकार से सवाल कर रहा है। अब जनता भी जानना चाहती है कि शराब की खाली बोतलों का पाया जाना सरकार को बदनाम करने की कोशिश है या वास्तव में कुछ हकीकत भी है। यह जांच का विषय है।
’विजय कुमार धानिया, नई दिल्ली
राहत के आसार

लंबे समय के बाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत गिरने लगी है। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि महंगाई से जूझ रही भारतीय जनता को आगामी दिनों में कुछ राहत मिल सकती है। र्इंधन महंगा होने से महंगाई बढ़ने के साथ-साथ औद्योगिक गतिविधियां, परिवहन और कृषि कार्य भी काफी हद तक प्रभावित होते हैं। पिछले महीने कच्चे तेल की कीमत 82 से 83 डालर प्रति बैरल थी, जो अब घट कर 68 डालर हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तेल की कीमतों में और गिरावट आने की संभावना है। ऐसे में उम्मीद है कि भारत सरकार भी महंगाई से त्रस्त जनता को कुछ राहत देने का काम करेगी।
’श्याम मिश्रा, दिल्ली विश्वविद्यालय

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