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चौपाल: श्वेत दंभ

कनाडा में एक आदिवासी महिला जॉइस को अस्पताल में श्वेत नर्स द्वारा प्रताड़ित किया गया। उसके रंग के वजह से उसे उलाहना दिया गया। महिला दर्द से कराहती रही। बाद में उसने दम तोड़ दिया।

शारीरिक रंग को लेकर समाज में हमेशा से एक भेदभाव रहा है।

गोरे रंग के दंभ के खिलाफ न जाने कितने कितने दर्शन गढ़े गए, कितने गीत लिखे गए, लड़ाइयां लड़ी गईं, लेकिन आज भी यह झूठा दंभ बरकरार दिखता है। ऐसा लगता है कि गोरे रंग का अहंकार खत्म होना बहुत मुश्किल है। मार्टिन लूथर किंग, महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला जैसे लोग इस रंगभेदी दुनिया से लड़ते एवं उन्हें समझाते हुए चले गए। मगर नस्लवाद का जहर देश दुनिया में आज भी फैल रहा है।

नवीनतम घटना कनाडा की है, जहां एक आदिवासी महिला जॉइस को अस्पताल में श्वेत नर्स द्वारा प्रताड़ित किया गया। उसके रंग के वजह से उसे उलाहना दिया गया। महिला दर्द से कराहती रही। बाद में उसने दम तोड़ दिया। उस नर्स को भले ही नौकरी से निकाल कर जांच समिति बैठा दी गई है, मगर गोरे रंग के गुमान और नस्ली घृणा को इससे शायद कोई फर्क नहीं पड़ने वाला और शायद वे अमानवीय बने रहना चाहते हैं।
’जंग बहादुर सिंह, जमशेदपुर, झारखंड

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