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राहुल गांधी: लाल छुट्टी पर

अपने बच्चे से ज्यादा प्रतिभाशाली और योग्य कोई हो सकता है यह बात एक मां मान ले तो फिर वह शायद ममतामयी मां का दर्जा खो दे। इसीलिए बच्चों को बिगाड़ने की तोहमत अक्सर मां के हिस्से में ही आती है। हरिशंकर परसाई ने लिखा है कि ‘मां का बिगड़ैल बेटा रूठता है तो मां […]

Author February 27, 2015 8:00 PM
देश की सत्ता तो लाल के पराक्रम से जाती रही पर बच्चे को कुछ तो चाहिए खेलने के लिए। (फ़ोटो-पीटीआई)

अपने बच्चे से ज्यादा प्रतिभाशाली और योग्य कोई हो सकता है यह बात एक मां मान ले तो फिर वह शायद ममतामयी मां का दर्जा खो दे। इसीलिए बच्चों को बिगाड़ने की तोहमत अक्सर मां के हिस्से में ही आती है।

हरिशंकर परसाई ने लिखा है कि ‘मां का बिगड़ैल बेटा रूठता है तो मां उसे खेलने के लिए खिलौना देती है, बच्चा खिलौना तोड़ता है तो मां खुश होती है। इंदिरा गांधी का बिगड़ैल बेटा संजय जब रूठा तो उन्होंने खेलने के लिए देश ही थमा दिया।’ संजय खेलते तो मैया अपने लाल की करतूतों पर निहाल हो जातीं। जिस तरह घर की चाबी सास से बड़ी बहू के पास आती है उसी तरह कांग्रेस की चाबी सोनिया गांधी के पास आ गई।

सासू-मां के पदचिह्नों पर चलते हुए बड़ी बहू ने भी अपने लाल के लिए वही मंसूबे पाले। दस साल तक वे राहुल को अपनी देखरेख में अभ्यास कराती रहीं। यदि 2014 में फिर से कांगे्रस सत्ता में आ जाती तो वे अपने जिगर के टुकड़े को पूरा देश ही सौंप देतीं। देश की सत्ता तो लाल के पराक्रम से जाती रही पर बच्चे को कुछ तो चाहिए खेलने के लिए।

लिहाजा उसने जिद पकड़ ली कि मुझे तो पार्टी चाहिए। मैया को कोई ऐतराज तो नहीं है, वे केवल इतना चाह रही हैं कि लाल उनकी निगरानी में ही खेले, जिससे भविष्य के लिए भी पार्टी बनी रहे। लेकिन लाल है कि रूठ कर छुट्टी पर चला गया।

 

श्याम बोहरे, बावड़ियाकलां, भोपाल

 

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