ताज़ा खबर
 

चौपाल: कथनी बनाम करनी

राहुल गांधी कुछ कहते हैं, पार्टी कुछ करती है। लेकिन क्या यह सच नहीं कि उन्हीं की पार्टी ने देश का बंटवारा करवाया, अनुच्छेद 30 द्वारा अल्पसंख्यकों को विशेषाधिकार दिए, हज एक्ट 1959 पारित कर हज सब्सिडी दी।

Author March 22, 2018 04:41 am
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (PTI फोटो)

राहुल गांधी ने भाजपा पर समाज को बांटने की राजनीति करने का आरोप लगाया। इसके अगले ही दिन उनकी पार्टी की कर्नाटक सरकार ने लिंगायतों को हिंदू समाज से अलग करके एक अल्पसंख्यक समूह का दर्जा देने की घोषणा कर दी। यह बंटवारे की राजनीति कौन कर रहा है? लिंगायत अनादि काल से हिंदू रहे हैं। संविधान के अनुच्छेद 30 द्वारा अल्पसंख्यकों को दिया गया विशेष दर्जा पाने के लिए उन्होंने कभी-कभी खुद को अल्पसंख्यक बताना शुरू किया होगा पर वे हिंदू त्योहार मनाते हैं, हिंदू देवी-देवताओं को पूजते हैं। सुप्रीम कोर्ट के खंडपीठ ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश आरसी लाहोटी के नेतृत्व में 2005 में निर्णय दिया था कि धार्मिक आधार पर नए अल्पसंख्यक वर्गों का निर्माण राष्ट्र-हित में नहीं है। कोर्ट का कहना था कि अल्पसंख्यकों की सूची उत्तरोत्तर कम की जानी चाहिए, न कि बढ़ाई जाए। राहुल गांधी कुछ कहते हैं, पार्टी कुछ करती है। लेकिन क्या यह सच नहीं कि उन्हीं की पार्टी ने देश का बंटवारा करवाया, अनुच्छेद 30 द्वारा अल्पसंख्यकों को विशेषाधिकार दिए, हज एक्ट 1959 पारित कर हज सब्सिडी दी, मुसलिम-बहुल कश्मीर को 370 द्वारा और ईसाई-बहुल मेघालय को 371-जी द्वारा विशेष दर्जे दिए, 1997 में ईसाई-बहुल मिजोरम में बाइबिल के आधार पर शासन चलाने का चुनावी वायदा किया? देश और समाज को बांटने पर सदा उतारू रही पार्टी के अध्यक्ष भाजपा पर इसका आरोप मढ़ें, यह हास्यास्पद है।
’अजय मित्तल, मेरठ

तीसरा विकल्प
दिल्ली में जब कांग्रेस अपने 84 वें महाधिवेशन के जरिए पार्टी में नई ऊर्जा भरने में जुटी है तो दूसरी ओर तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव तीसरे विकल्प का रास्ता तैयार कर रहे हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले किसी भी विपक्षी पार्टी के लिए यह फैसला करना आसान नहीं होने वाला है कि दोनों में से किसी एक खेमे को थामे बिना चुनावी मैदान में उतरें, चाहे वह ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस हो या मायावती की बसपा या फिर अखिलेश यादव की सपा। यह तो सच है कि देश में वैकल्पिक एजेंडे और दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति की जरूरत है। मगर इस पूरी कवायद में ध्यान रखा जाना चाहिए कि केंद्र की सत्ता पर काबिज होना है तो यहकाम देशवासियों के भरोसे को जीते बगैर कतई संभव नहीं है।
’पियूष कुमार, नई दिल्ली

बेरोजगारी का विकास
देश में बेरोजगारों की बढ़ती संख्या हमारी शिक्षा पद्धति की दयनीय दशा को उजागर करती है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद के लिए अगर पीएचडी या एमबीए डिग्री धारी आवेदन करते हैं तो यह स्थिति समझ में आ जाती है। हमें नए रोजगार सृजन की जरूरत है पर इससे ज्यादा जरूरी है शिक्षा प्रणाली में सुधार करने की। जब तक हम समस्या की जड़ तक नहीं पहुंचेंगे, समाधान बेमानी है। शिक्षा का स्तर दिन-ब-दिन गिरता जा रहा है। इसके लिए सभी की जवाबदेही बनती है, चाहे वह शिक्षक हो या सरकार। यह पूरी प्रणाली भ्रष्टाचार से बुरी तरह ग्रस्त है। सरकार योजनाएं बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ती, पर सिर्फ योजना बना लेने से कुछ नहीं होता, योजना का क्रियान्वयन भी जरूरी है। समय आ गया है कि उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाए, रोजगार की बजाय व्यक्ति आत्मनिर्भर बने, उसे डिग्रीधारी बनाने की बजाय काबिल बनाया जाए। ऐसा शिक्षा पद्धति में बदलाव से संभव है और यह बदलाव तभी होगा जब जमीनी स्तर से परिवर्तन होगा। बच्चों में योग्यता विकसित की जानी चाहिए ताकि वे आगे चल कर नौकरियों पर निर्भर रहने की बजाय खुद के बलबूते कुछ कर सकें। आगे स्थिति और गंभीर नजर आ रही है। अगर हमने अभी इस ओर ध्यान नहीं दिया तो यह बेरोजगारी का दानव और विकराल रूप ले लेगा।
’शिल्पा जैन सुराणा, वारंगल

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App