ताज़ा खबर
 

चौपालः इंसानियत का तकाजा

संवेदनहीनता का एक और मामला मुरादाबाद में नजर आया जहां कार की टक्कर से घायल एक युवक ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।

Author June 13, 2018 05:27 am
प्रतीकात्मक चित्र

संवेदनहीनता का एक और मामला मुरादाबाद में नजर आया जहां कार की टक्कर से घायल एक युवक ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। उसकी घायल बहन लोगों के सामने मदद के लिए गिड़गिड़ाती रही, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की। इसी तरह कोटा का सत्रह साल का किशोर सड़क हादसे का शिकार हुआ। वह बीस मिनट तक सड़क पर तड़पता रहा, मगर कोई उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया। एक अन्य घटना में पति-पत्नी और बच्चे स्कूटर पर सवार थे कि पीछे से एक ट्रक ने टक्कर मार दी। बीवी और बच्चे ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। पति मदद के लिए गुहार लगाता रहा, पर लोग सामने से गुजरते रहे। किसी ने उनकी मदद नही की, न किसी ने पुलिस को फोन किया।

भारत मे सड़क हादसों के आंकड़े दिल दहलाने वाले हैं। शायद ही कोई ऐसा दिन आया, जब ऐसे हादसों की खबर अखबार में नहीं आई। मगर खबर तो सिर्फ खबर होती है। सोशल मीडिया पर दुनिया के सामने हम संवेदनशीलता की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। अच्छे-अच्छे संदेश भेजते हैं। लेकिन जरूरत पड़ने पर हम जैसे लोग ही मूकदर्शक बन जाते हैं। शर्म तो तब आती है जब लोग ऐसी घटनाओं का वीडियो बनाते रहते हैं।

सरकार ने यह नियम बना दिया है कि जो भी सड़क हादसे में घायल किसी व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाता है तो उससे किसी भी तरह की पूछताछ नहीं की जाएगी। फिर भी लोगों में जागरूकता का अभाव है। जरूरी है कि इस बारे में लोगों को मार्गदर्शन दिया जाए। पुलिस और प्रशासन भी मुहिम चलाए। मीडिया सहयोगी बने। जो लोग हादसे में घायल लोगों की मदद करने के लिए आगे आते हैं, उन्हें बढ़ावा देना चाहिए, क्योंकि असली हीरो तो ऐसे ही लोग होते हैं, जो दूसरों की मदद करने से नहीं कतराते। जो लोग असमय ही काल-कवलित हो जाते हैं, उन परिवारों की पीड़ा कोई नहीं समझ सकता। हमारी इंसानियत किसी के घर का चिराग बुझने से बचा सकती है।

शिल्पा जैन सुराणा, वारंगल, तेलंगाना

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App