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चौपालः गिरावट का अर्थ

निया में कई देश ऐसे हैं जिन्होंने कोरोना को बिना तालाबंदी के भी मात दी है। लेकिन हमने उनसे सीखने की कोशिश नहीं की।

कोराना और खासतौर पर अनियोजित तालाबंदी के कारण भारत में कृषि, उद्योग और सेवा- तीनों ही क्षेत्र में गिरावट आई है।

ताजा खबर के मुताबिक जून से अगस्त की तिमाही में भारत की जीडीपी में ऋणात्मक 23.9 प्रतिशत हो गई है। 1996 से तिमाही जीडीपी के आंकड़े सामने आने शुरू हुए हैं। तब से अब तक की यह सबसे बड़ी गिरावट है। निश्चित ही यह चिंतनीय मुद्दा है। कोराना और खासतौर पर अनियोजित तालाबंदी के कारण भारत में कृषि, उद्योग और सेवा- तीनों ही क्षेत्र में गिरावट आई है। कई छोटे कारखाने बंद हो गए। होटल और पर्यटन उद्योग पूरी तरह से चरमरा गया। जून से अब तक अठारह लाख से भी अधिक लोगों की नौकरी खत्म हो जाना और लाखों लोगों का रोजगार जाना बहुत ही दुखद है। गौरतलब है कि अर्थव्यवस्था के चौपट होने से कोरोना से हमारी लड़ाई और ज्यादा कठिन हो जाएगी।

दुनिया में कई देश ऐसे हैं जिन्होंने कोरोना को बिना तालाबंदी के भी मात दी है। लेकिन हमने उनसे सीखने की कोशिश नहीं की। हम भावनाओं में बह कर ताली-थाली बजा कर कोरोना को खत्म करने के प्रयासों में जुटे रहे, जिसकी दुनियाभर में तौहीन हुई। जिस चीन को हम दोषी करार देते रहे, उसके सामानों का विरोध करते रहे, उसकी जीडीपी में भी जनवरी से मार्च में 6.8 प्रतिशत की गिरावट आई थी, पर अप्रैल से जून की तिमाही में उसकी जीडीपी में 3.2 प्रतिशत की की बढ़ोतरी हो गई।

हमने उससे सीखने की कोशिश नहीं की। हमने अपने रोजगार क्षेत्र को चीन की तरह से विकेंद्रित कभी नहीं किया। अभी भी अगर हमने अर्थव्यवस्था की ओर ध्यान नहीं दिया तो भविष्य में और मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। इस देश के भविष्य कहे जाने वाले युवा के सामने संकट छाया हुआ है। उसकी नौकरी जा रही है। रोजगार भी ठप्प हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सरीखे बुनियादी ढांचे भी कठिन दौर में हैं। ऐसे में क्या हम अंदाजा लगा पा रहे हैं कि यह युवा शक्ति और ऊर्जा किस रास्ते जाएगी! इस पर सरकार को तुरंत ध्यान देने की दरकार है।
’शिवनारायण गौर, सलैया, भोपाल, मप्र

आजादी के साथ
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’बृजेश माथुर, गाजियाबाद, उप्र

 

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