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चौपाल: चिंता के पायदान

गरीबी और भूख मानवता के सबसे बड़े अभिशाप हैं। हाल ही में इस पर अलग-अलग वैश्विक सर्वेक्षण सामने आए हैं। इसमें भारत की स्थिति अत्यंत बदतर होने की दिशा में ही आगे बढ़ती हुई दिख रही है। वैश्विक भूख सूचकांक में भारत को सूडान जैसे अत्यंत पिछड़े हुए देशों के साथ रैंकिंग साझा करनी पड़ी है।

Author October 24, 2020 6:02 AM
job loss due to coronavirusकोरोना काल में दुनिया भर में गईं 50 करोड़ नौकरियां

गरीबी और भूख मानवता के सबसे बड़े अभिशाप हैं। हाल ही में इस पर अलग-अलग वैश्विक सर्वेक्षण सामने आए हैं। इसमें भारत की स्थिति अत्यंत बदतर होने की दिशा में ही आगे बढ़ती हुई दिख रही है। वैश्विक भूख सूचकांक में भारत को सूडान जैसे अत्यंत पिछड़े हुए देशों के साथ रैंकिंग साझा करनी पड़ी है। यह हमारे ‘गरीबी उन्मूलन और पोषण कार्यक्रमों’ की असफलता को प्रमाणित करता है। लिहाजा सरकार को तत्काल इससे संबंधित सभी कार्यक्रमों में सुधार संबंधी प्रस्तावों पर सकारात्मक पहल करनी चाहिए। सार्वजनिक वितरण प्रणाली भ्रष्टाचार और अनियमितता की सबसे बड़ी योजनाओं में से है।

इसलिए इसमें ‘गुणात्मक सुधार’ करते हुए इसे ‘पोषण’ से जोड़ा जाना चाहिए और पात्रता मानदंडों को फिर से परिभाषित करते हुए ‘अपात्रों’ को बाहर करने और ‘पात्रों’ को जोड़ने के लिए अभियान की जरूरत है। स्वच्छ राशन, समय पर राशन और पूरे राशन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए संरचनात्मक सुधार के साथ पोषण की तरफ भी ध्यान देना चाहिए।

इन सबके साथ हमें यह भी ध्यान रखने की जरूरत है कि गरीबी और भूख से निपटने के लिए किसी भी योजना की सफलता कृषि में सुधारों के बिना संभव नहीं है, जहां देश का आधे से अधिक मानव संसाधन समायोजित है। इसलिए यहां भी किसान को मिलने वाले मूल्य और कृषि उत्पाद के उपभोक्ताओं द्वारा चुकाए जाने वाले मूल्यों में अंतर कम करने के लिए पहल किए जाने की जरूरत है।
’वीरेंद्र बहादुर पांडेय, गोंडा, उप्र

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