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चौपाल: चकाचौंध का अंधेरा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां भी अश्वेत लोगों को राहत पहुंचाने में कम उनकी भावनाओं को आहत करने की ज्यादा है, ताकि दंगे-फसाद हो, जिससे बहुसंख्यक गोरे समुदाय में असुरक्षा बोध होकर ट्रंप को लोग फिर से चुन लें।

racism, agitation against racismप्रदर्शनकारियों के आक्रोश के आगे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बंकर में छिपना पड़ा।

आजकल दुनियाभर में अधिकतर देशों में सत्ता पर ऐसे लोग पहुंच गए हैं जो समाज में जाति या फिर नस्ल के आधार पर वैमनस्यता और रंगभेद आदि को भड़का कर अपनी सत्ता को बरकरार रखना चाह रहे हैं। इसमें इंडोनेशिया, ब्राजील, तुर्की और भारत तो हैं ही, अमेरिका भी इससे अछूता नहीं है! खबरों के मुताबिक अमेरिका के कर्णधारों और पुलिस व्यवस्था में अश्वेत लोगों के प्रति जबर्दस्त पूर्वाग्रह और असहिष्णुता है।

इसी वजह से बारह प्रतिशत की आबादी वाले अश्वेत लोग गोरी चमड़ी वाले आम अमेरिकियों से हर तरह से पिछड़े हैं। मसलन, अधिकतर अश्वेत लोग छोटी-मोटी नौकरियों से कम आय में ही जैसे-तैसे अपना गुजारा कर रहे हैं। इनकी नौकरी भी दफ्तर की आरामदायक और बड़ी नौकरी न होकर सड़कों, पार्कों, खेतों आदि में काम करने की है, जिससे इनमें कोरोना जैसी बीमारी का संक्रमण भी गोरी चमड़ी वालों से ज्यादा प्रतिशत में हो रही है।

चूंकि ये आर्थिक रूप से गोरों से विपन्न स्थिति में भी हैं, इसलिए कोरोना संक्रमित होने पर वे वहां के निजी महंगे अस्पतालों में इलाज कराने की तुरंत स्थिति में नहीं हैं। फलस्वरूप आंकड़ों के मुताबिक उनके मरने की दर भी काफी ज्यादा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियां भी अश्वेत लोगों को राहत पहुंचाने में कम उनकी भावनाओं को आहत करने की ज्यादा है, ताकि दंगे-फसाद हो, जिससे बहुसंख्यक गोरे समुदाय में असुरक्षा बोध होकर ट्रंप को लोग फिर से चुन लें। लेकिन किसी भी लोकतांत्रिक समाज में सभी के सुख की नीति ही सर्वश्रेष्ठ होती है, इसलिए अभी पिछले दिनों अश्वेत लोगों के प्रति पूर्वाग्रह से ग्रस्त वहां की पुलिस द्वारा सड़क पर एक अश्वेत व्यक्ति की अकारण क्रूर हत्या करने के बाद वहां काले लोगों द्वारा भयंकर दंगा भड़क उठने पर ट्रंप को वाइट हाउस के बंकर में छिपना पड़ा था।

वहीं ट्रंप के मुख्य प्रतिद्वंदी जोसफ वाइडेन मृतक के परिवार से मिल कर सहानुभूति प्रकट करने और अश्वेत लोगों के हिंसक आंदोलन को बातचीत के जरिए सुलझाने की पहल की, जो किसी भी समाज और देश के लिए सर्वथा न्यायोचित है।
’निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद, उप्र

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