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चौपालः कुपोषण से मुक्ति

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी का एक प्रसिद्ध वक्तव्य है, ‘भूख के खिलाफ जंग ही मानवता की आजादी का असली जंग है।’

Author September 3, 2018 1:56 AM
वैश्विक भूख सूचकांक, पोषण रपट, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे आदि सभी स्रोतों से एकत्रित आंकड़े भारत में भूख और कुपोषण से लिपटी बहुजन की आबादी को बयान करते हैं।

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी का एक प्रसिद्ध वक्तव्य है, ‘भूख के खिलाफ जंग ही मानवता की आजादी का असली जंग है।’ भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 सभी नागरिकों को गरिमा और सम्मान के साथ जीवन जीने के अधिकार की गारंटी देता है और कोई भी व्यक्ति गरिमा एवं सम्मान के साथ अपना जीवन यापन तभी कर सकता है, जब उसे खाने के लिए भोजन, पहनने के लिए वस्त्र और रहने के लिए आवास उपलब्ध हो सके। व्यक्ति सम्मान और गरिमा के साथ जीवन यापन कर सके, इसके लिए संविधान में एक और अनुच्छेद 47 का प्रावधान किया गया। यह अनुच्छेद कहता है कि ‘राज्य जनता के पोषण और रहन-सहन का स्तर उन्नत करने व सार्वजनिक स्वास्थ्य में बढ़ोतरी को अपना मुख्य कर्तव्य मानेगा।’

बावजूद इसके आलम यह है कि आजादी के इकहत्तर वर्ष के बाद भी भारत को कुपोषण से मुक्ति नहीं मिली। आंकड़ों के अनुसार हर साल दस लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषण के कारण काल के गाल में समा जाते हैं। भारत की कुल आबादी का 14.5 फीसद भाग अर्थात लगभग 19 करोड़ लोग कुपोषित हैं। एक और रिपोर्ट के मुताबिक भूख की समस्या से ग्रस्त दुनिया का हर चौथा व्यक्ति हिंदुस्तानी है। मसलन, भारत दुनिया की सबसे बड़ी भूखी आबादी वाला देश है। हाल ही में जारी वैश्विक भूख सूचकांक में भारत 119 देशों की सूची में 100 वें स्थान पर था। इंटरनेशनल फूड पॉलिसी इंस्टीट्यूट द्वारा जारी एक सूची के मुताबिक भारत में भूख की समस्या लगभग उत्तर कोरिया और इराक के बराबर है। एशियाई देशों में भारत का प्रदर्शन निम्न दर्जे का है। हम केवल पाकिस्तान और अफगानिस्तान के मुकाबले बेहतर स्थिति में हैं।

वैश्विक भूख सूचकांक, पोषण रपट, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे आदि सभी स्रोतों से एकत्रित आंकड़े भारत में भूख और कुपोषण से लिपटी बहुजन की आबादी को बयान करते हैं। कुपोषण भारत की आर्थिक प्रगति एवं सामाजिक सशक्तीकरण में सबसे बड़ा बाधक है। कुपोषण रूपी त्रासदी से निपटने के लिए सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर नीतियां और योजनाएं बनाई जाती रही हैं। इस कड़ी में प्रधानमंत्री द्वारा राजस्थान के झुंझुनू से 8 मार्च 2018 को राष्ट्रीय पोषण अभियान का शुभारंभ कुपोषण से मुक्ति की जंग में सरकार की एक अतिमहत्त्वपूर्ण व महत्त्वाकांक्षी योजना है। कुपोषण की समस्या से निजात पाने के लिए सिर्फ पोषण अभियान ही कारगर नहीं होगा, बल्कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली की व्यवस्था को भी उचित एवं ईमानदारी पूर्वक क्रियान्वित करने की आवश्यकता है ताकि हर जरूरतमंद को खाद्य पदार्थ आसानी से उपलब्ध हो सके। हमारे देश में ब्रिटेन के कुल उत्पादन के बराबर खाद्य पदार्थ बर्बाद चला जाता है। अगर खाद्य पदार्थ की बर्बादी को उचित भंडारण एवं वितरण के माध्यम से रोका जाए तो कुपोषण की समस्या को काबू में किया जा सकता है।

कुंदन कुमार क्रांति, बीएचयू, वाराणसी

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