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निराशा की धुंध

वर्तमान परिदृश्य में समूचे देश में युवा वर्ग बेरोजगारी के भंवर जाल में फंसता नजर आ रहा है।

unemployementसांकेतिक फोटो।

वर्तमान परिदृश्य में समूचे देश में युवा वर्ग बेरोजगारी के भंवर जाल में फंसता नजर आ रहा है। जहां तक उत्तर प्रदेश का सवाल है, प्रयागराज और लखनऊ जैसे बड़े शहरों में विभिन्न शैक्षिक क्षेत्रों के प्रतियोगी और अभ्यर्थी बड़ी तादाद में सड़कों पर उतर कर और सोशल मीडिया के माध्यम से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।

वर्तमान में आलम यह है कि विभिन्न सरकारी विभागों में पदों के रिक्त होने के बावजूद शासन द्वारा न तो इन पदों को भरने के लिए कोई दिशा-निर्देश जारी किया गया है और न ही शिक्षित बेरोजगारों की बढ़ती फौज की समस्या को दूर करने के लिए कोई सार्थक प्रयास किया जा रहा है।गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में सहायक अध्यापकों की भर्ती में अवशेष पदों के सापेक्ष योग्य अभ्यर्थियों की उपलब्धता के बावजूद उनको नियुक्ति देने में आनाकानी की जा रही है, जिसके चलते अभ्यर्थी आए दिन अपना अध्ययन या अन्य जीविकोपार्जन संबंधी कार्यों को छोड़ कर धरना-प्रदर्शन करते हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों और शासन द्वारा सिर्फ आश्वाशन देकर जबरन उन्हें धरनास्थल से हटा दिया जाता है।

सरकारें आती हैं, जाती हैं और सत्ता पक्ष द्वारा सिर्फ अपने राजनीतिक फायदों के लिए आम जनता, खासकर युवा वर्ग और किसानों और उनके रोजगार या फिर हितों के साथ खिलवाड़ किया जाता है। समय के साथ बहुत कुछ बदलता रहता है। अगर कुछ नहीं बदलता है तो वह है किसानों और युवावर्ग की बेबसी, लाचारी और उनका मानसिक और आर्थिक शोषण।

शासन तथा प्रशासन को प्रत्येक स्तर पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए ठोस एवं प्रभावी कदम उठाकर देश और प्रदेश में व्याप्त प्रमुख समास्याओं के निराकरण के लिए सार्थक प्रयास करना चाहिए। तभी उचित हल निकलने की उम्मीद की जा सकती है और किसानों और युवावर्ग को निराशा के गर्त से बाहर निकाला जा सकता है।
’शशिभूषण बाजपेयी, बहराइच, उप्र

आत्मनिर्भरता की ओर

खिलौना उद्योग भारत में एक बड़ा उद्योग है। आत्मनिर्भर भारत के तहत हमारा लक्ष्य अब अपने देश में ही खिलौने बनाना है, क्योंकि हम अन्य देशों से, विशेष रूप से थोक में चीन से खिलौने आयात करते हैं। चीनी खिलौने पर्यावरण के अनुकूल नहीं होते हैं, इसलिए वे हमारे बच्चों के लिए भी हानिकारक हैं। इनमें खतरनाक रसायनों का उपयोग किया जाता है।

भारतीय खिलौने पर्यावरण के अनुकूल, सस्ते और टिकाऊ हैं। व्यापारियों को बड़े पैमाने पर खिलौने बनाने के लिए विकसित उद्योग लगाने चाहिए, ताकि अधिक से अधिक रोजगार पैदा हो। यह हमारी विदेशी मुद्रा को भी बचाएगा। हमारे पास इस लक्ष्य को प्राप्त करने की क्षमता है। हम सभी को भारत में बने उत्पादों को खरीदना चाहिए। इसके कई उपयोग हैं। यह भारत को आत्मानिर्भर बनाएगा, रोजगार पैदा करेगा और धन की बचत करेगा। कई अन्य क्षेत्रों में हम लक्ष्य प्राप्त करने के बहुत निकट हैं।

इसलिए, भारत में अधिकतम चीजें बनाना सबसे महत्त्वपूर्ण है। कुछ नवाचारों को जल्द से जल्द शुरू किया जाना चाहिए। यह भारत को पांच खरब की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य हासिल करने में मदद करेगा और शीर्ष देशों में भारत की स्थिति को सर्वश्रेष्ठ बनाने में भी सहायक होगा।
’नरेंद्र कुमार शर्मा, जोगिंदर नगर, हिप्र

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