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आबादी की अड़चन

भारत संसार में पहला देश है, जहां जनसंख्या नियंत्रित करने के लिए सरकारी स्तर पर हर साल करोड़ों रुपए परिवार नियोजन कार्यक्रम पर खर्च किए जाते हैं।

आबादी की अड़चन
सांकेतिक फोटो।

‘जनसंख्या नीति और सुशासन’ (23 सितंबर) लेख इस विषय पर चर्चा करता है कि किसी देश की जनसंख्या दोधारी तलवार का काम करती है! जनसंख्या के कम होने से श्रम की पूर्ति कम होती है, कुल मांग कम होती है, कुल निवेश कम होता है, कुल उत्पादन कम होता है और देश नहीं हो पाता! यही कारण है कि पश्चिमी देश श्रम की पूर्ति के कम हो जाने से विदेशी नागरिकों को अपने यहां काम पर लगा कर विकास की दर को तेज करते हैं। इसलिए जनसंख्या का कम होना विकास की गति में एक बहुत बड़ा अवरोध है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि जनसंख्या का ज्यादा होना किसी देश के लिए फायदे की बात है!

किसी देश की जनसंख्या के ज्यादा होने से वहां बेरोजगारी, खाद्य पदार्थों की कमी, कुपोषण, गरीबी, बचत तथा निवेश में कमी, कानून तथा अवस्था की समस्या, अपराधों में वृद्धि, संख्या का ग्रामीण क्षेत्रों से नागरिक क्षेत्र में पलायन, आवास की समस्या, पीने के पानी की कमी, चिकित्सा सुविधाओं का अभाव, कुपोषण आदि समस्याएं पैदा हो जाती हैं! कारण है कि जनसंख्या और सुशासन का सीधा संबंध है। अधिक जनसंख्या की समस्या सुशासन के द्वारा हल की जा सकती है। सुशासन में सरकार के द्वारा जनसंख्या नियंत्रण के लिए उचित नीति, लोगों को जनसंख्या रोकने के लिए उचित मार्गदर्शन, चिकित्सा सुविधाएं आदि प्रदान करना शामिल होता है।

एक समय सरकार की जनसंख्या नीति के तहत ‘हम दो, हमारे दो’ को अपनाया गया था। 1975 में जब देश में आपातकाल की घोषणा की गई तब जनसंख्या को बढ़ने से रोकने के लिए जबरन नसबंदी शुरू कर दी गई। इसका कुछ लाभ तो हुआ, लेकिन जनमानस ने इसका विरोध किया। लेकिन जब 1977 में जनता सरकार बनी तो उन्होंने अनिवार्य नसबंदी के बदले में स्वैच्छिक नसबंदी की नीति अपनाकर परिवार नियोजन को परिवार कल्याण का नाम दे दिया।

भारत में बढ़ती चिकित्सा सुविधाएं और जागरूकता के फलस्वरूप देश में मृत्यु दर में तो कमी हो गई, लेकिन जन्म दर में आवश्यकता के अनुसार कमी नहीं आई। आज देश में बेकारी, कुपोषण, भुखमरी, बचत तथा निवेश में कमी, कीमतों में निरंतर वृद्धि, ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों में लोगों का पलायन, कानून-व्यवस्था की समस्या, सरकारी साधनों का अपव्यय आदि समस्याएं दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही हैं।

भारत में आबादी के बढ़ने का एक बड़ा कारण बड़ी संख्या में विदेशों से कानूनी और गैरकानूनी तौर पर आकर बसने वाले लोगों की संख्या है, जो दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। अगर बेरोजगारी, कुपोषण, भुखमरी, गरीबी, चिकित्सा सुविधाओं की कमी, अशिक्षा, विकास की गिरती दर आदि को दूर किया जाना है तो उसके लिए सरकार को जनसंख्या संबंधी ऐसी नीति बनानी होगी, जिसमें परिवार नियोजन अपनाने के लिए आंशिक अनिवार्यता देखने को मिले!
शाम लाल कौशल, रोहतक

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First published on: 29-09-2022 at 03:56:48 am
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