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चौपालः प्रदूषित नदियां

देश के बीस राज्यों में बहने वाली अड़तीस प्रमुख नदियों की सफाई पर पिछले बीस सालों में लगभग तीस अरब रुपए खर्च किए गए हैं।

Author October 9, 2018 11:39 AM
नदियों के जल को प्रदूषित करने के लिए मुख्य से घरेलू मल-जल और कल कारखानों का गंदा पानी जिम्मेदार है।

प्रदूषित नदियां

देश के बीस राज्यों में बहने वाली अड़तीस प्रमुख नदियों की सफाई पर पिछले बीस सालों में लगभग तीस अरब रुपए खर्च किए गए हैं। जिन नदियों की सफाई पर इतनी मोटी रकम खर्च की गई उनमें मुख्य रूप से गंगा, यमुना, गोमती, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, दामोदर, महानंदा और सतलुज जैसी बड़ी नदियां शामिल हैं। इन नदियों के जल को प्रदूषण-रहित बनाने के लिए सरकार ने पानी की तरह पैसा बहाया, लेकिन ये प्रदूषण रहित होने की बजाय अतिगंभीर रूप से प्रदूषण का शिकार होती गर्इं। गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने की कई योजनाओं पर दो हजार करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी गंगा मैली की मैली ही है। स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण को कहना पड़ रहा है कि सरकार साइन बोर्ड लगाकर उन पर लिखे कि ‘गंगा का जल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, अत: इसमें स्नान न करें।’

नदियों के जल को प्रदूषित करने के लिए मुख्य से घरेलू मल-जल और कल कारखानों का गंदा पानी जिम्मेदार है। नदियों में सत्तर फीसद मल-जल कचरा और बीस फीसद कल कारखानों का गंदा पानी गिराया जाता है जिसके कारण अब उनका पानी पीने योग्य नहीं रहा। विश्व स्वास्थ्य संगठन कीएक रिपोर्ट के अनुसार प्रदूषित जल पीने के कारण भारत में पांच करोड़ लोग बीमार होते हैं। इनमें से बीस लाख लोग काल के गाल में समा जाते हैं। गंदा पानी पीने से होने वाली बीमारियों के इलाज पर पांच सौ करोड़ रुपए सालाना खर्च होते हैं। भारत की विभिन्न नदियां प्रमुख 2,431 नगरों से होकर गुजरती हैं लेकिन विडंबना है कि केवल 176 नगरों में मल-जल निकासी की व्यवस्था है। बाकी बचे 2255 नगरों का मल-जल सीधे नदियों में बहा दिया जाता है। नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाना सिर्फ सरकार के बस की बात नहीं है। सरकार नियम-कानून बनाती है लेकिन उनका पालन जनता को ही करना पड़ता है। इसलिए हम सबका दायित्व है कि आने वाले गंभीर जल संकट से निपटने के लिए अपनी नदियों को स्वच्छ बनाए रखें। वरना नदियों में बढ़ता प्रदूषण एक दिन हम लोगों की जीवन लीला को समाप्त कर देगा।

कुंदन कुमार क्रांति, बीएचयू, वाराणसी

दागियों से दूर

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दागियों के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने के लिए संसद ही कठोर कानून बनाए। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए सभी दलों के पास समय है कि वे दागियों को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए कारगर कानून बनाएं। सभी दल खुद को सच्चा देशभक्त बताते हुए समय-समय पर दागियों से दूर रहने और स्वच्छ राजनीति का दावा भी करते रहते हैं। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में गेंद सरकार के पाले में डाल दी है, जो उसकी नेक मंशाओं की अग्नि परीक्षा है। यह मौका है कि लोकसभा व राज्यसभा के सभी दलों के सदस्य एकमत से दागियों को चुनाव लड़ने से वंचित करने का उचित कानून बनाएं। अभी लोहा गरम है, इस पर चोट कर ये दल अपनी नेक नीति और नीयत का परिचय देते हुए राजनीति में शुचिता के लिए अपनी प्रतिबद्धता की मिसाल भी प्रस्तुत कर सकते हैं।

हेमा हरि उपाध्याय, खाचरोद, उज्जैन

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