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राहुल की राजनीति

पिछले साल लोकसभा चुनाव के समय मैं अपने गांव गया हुआ था। एक दिन पता चला कि कुछ ही दूरी पर (सलेमपुर, जिला-देवरिया, उप्र) राहुल गांधी की सभा होने वाली है। मैं भी पहुंच गया।

Author Published on: August 19, 2015 8:22 AM

पिछले साल लोकसभा चुनाव के समय मैं अपने गांव गया हुआ था। एक दिन पता चला कि कुछ ही दूरी पर (सलेमपुर, जिला-देवरिया, उप्र) राहुल गांधी की सभा होने वाली है। मैं भी पहुंच गया। उस वक्त चुनाव में मोदीमय माहौल था। कांग्रेस की हालत खस्ता थी। राहुल गांधी की सभा में उम्मीद से ज्यादा भीड़ इकट्ठी हो गई। राहुल नीली जींस और सफेद कुर्ते में बिना ज्यादा देर इंतजार कराए ही आ गए थे।

हमारे इलाके के लोग पहली बार राहुल को सुनने के लिए उत्साहित दिख रहे थे। राहुल गांधी ने भाषण देना शुरू किया। माहौल थोड़ा-बहुत जमने लगा और लोग ध्यान से सुनने लगे। लेकिन तभी बीच में ही फुस्स हो गए पटाखे की तरह करीब ग्यारह मिनट में ही राहुल बाबू ने अपना भाषण खत्म कर दिया। पहली बार यह देखा कि किसी चुनावी राजनीतिक सभा में लोग नेता को सुनना चाहते हैं लेकिन नेताजी सामने बैठी हुई जनता को छोड़ कर भाषण खत्म करके चल दिए। लोग निराश हुए। गोरखपुर से रैली ‘कवर’ करने आए पत्रकारों ने कहा कि इससे ना हो पाएगा!
पिछले दिनों लोकसभा में राहुल गांधी जोर-शोर से बोल रहे थे। लोकसभा अध्यक्ष उन्हें अपनी बात खत्म करने को कह रही थीं। राहुल गांधी लगातार बोल रहे थे यह कहते हुए कि बस ‘कन्क्लूड’ कर रहा हूं। तब से लेकर अब तक राहुल गांधी ने एक मुश्किल सफर तय किया है, जिसमें कांग्रेस की सबसे बड़ी हार भी है, तो खुद का पूरे देश में मजाक बन जाना भी है।

साथ ही एक ऐसी रहस्यमय छुट्टी भी है जिसका हर आदमी अपने-अपने तरीके से अंदाज लगाता है। भारतीय राजनीति को देखने-समझने वाला कोई भी व्यक्ति इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि राहुल गांधी अब पहले वाले राहुल नहीं रहे। वर्तमान राजनीति में राहुल उतने ही प्रासंगिक होते जा रहे हैं जितने उन पर बनने वाले चुटकुले अप्रासंगिक होते जा रहे हैं।
वहीं दूसरी तरफ मोदी पर बनने वाले चुटकुलों की संख्या बढ़ गई है। मोदी की छवि धूमिल हुई है। अब वही लोग सरकार की आलोचना कर रहे हैं जो कुछ दिन पहले तारीफ करते थे। कुछ महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को पीछे हटना पड़ा तो व्यापमं और ललितगेट ने भाजपा की अच्छी-खासी छीछालेदर कर दी। खूब बोलने वाले मोदी पर ‘मनमोहन सिंह द्वितीय’ होने के आरोप लग रहे हैं।
वर्तमान राजनीतिक माहौल को देख कर लग रहा है कि राजनीति के माहिर खिलाड़ी कांग्रेसी नींद से जग गए हैं। राहुल गांधी हर जगह दिख रहे हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों के दौरे कर रहे हैं। वे एफटीआइआई के छात्रों के संघर्ष में भी जा रहे हैं तो पत्रकार अक्षय सिंह और कलाम के अंतिम संस्कार में भी पहुंच रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी सक्रिय हो गए है। कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम भी सक्रिय हो गई है। यही भाजपा के लिए चिंता का विषय है।
’प्रशांत मिश्र, भोपाल

सबक कब
आतंकवाद पर ढुलमुल रवैए और दोमुंही नीति का खमियाजा पाकिस्तान को एक बार फिर उठाना पड़ा है। इसका ताजा उदाहरण पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में रविवार को गृहमंत्री शुजा खानजादा के पैतृक आवास पर हुआ हमला है। अब पाकिस्तान को यह स्पष्ट करना है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति क्या है? पहले पेशावर में स्कूली बच्चों और अब पाक के पंजाब प्रांत के गृहमंत्री पर हुए हमले जैसी जघन्य आतंकवादी वारदातों से क्या पाकिस्तान कोई सबक लेगा?
’राकेश कुमार, करावल नगर, दिल्ली दागी प्रतिनिधि
आज जब किसी व्यक्ति को पार्टी उम्मीदवार घोषित करती है तो उसकी कसौटी अच्छा नेतृत्व और सुशासन का भरोसा नहीं बल्कि मोटी रकम होती है क्योंकि उसे टिकट के बदले पैसा ऐंठना होता है। जब कोई राजनीति को व्यवसाय समझ कर लाखों-करोड़ों की पंूजी का निवेश कर सत्ता के गलियारे में पहुंचेगा तो उसकी प्राथमिकता पैसा लूटने की होगी न कि जनसेवा की। यही कारण है बड़े-बड़े घोटालों और भ्रष्टाचारों का। सोलहवीं लोकसभा के चुनाव में जीत कर संसद तक पहुंचे 541 सदस्यों में से 186 पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 112 पर बलात्कार, अपहरण जैसे गंभीर आपराधिक मामले हैं।
राजनेताओं में चारित्रिक गिरावट देश के लिए बहुत गंभीर मसला है क्योंकि हर वह घटना जो राजनीति के गलियारे में घटती है उसका सीधा सरोकार जनता से होता है। राजनेता जनता का प्रतिनिधि होता है इसलिए उसके हर कदम से जनता प्रभावित होती है। ऐसे में उम्मीद की जाती है कि जनता पर पड़ने वाला प्रभाव सकारात्मक हो, जनहित में हो।

’शुभम श्रीवास्तव, गाजीपुर

प्रतिभा की जगह
गूगल के सीइओ पद पर सुंदर पिचाई की नियुक्ति भारतीय प्रतिभा का वैश्विक सम्मान है। गूगल एक विश्व प्रतिष्ठित कंपनी है तो उसके पास प्रतिभाओं की कमी नहीं रही होगी। लेकिन पिचाई ने ग्यारह साल के करियर में नए-नए प्रयोगों से अपनी क्षमता और योग्यता का लोहा मनवाया। सत्या नाडेल माइक्रोसाफ्ट के सीइओ हैं। इन्होंने भी विश्व पटल पर भारत को मजबूत पहचान दी है। यहां सवाल है कि सूचना तकनीक और अन्य क्षेत्रों की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी विदेशों की बड़ी कंपनियों में अपनी जगह बना लेते हैं लेकिन भारत में इन प्रतिभाओं को क्षमतानुरूप अवसर क्यों नहीं मिलता? प्रतिभा पलायन रोकना भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है।
’ पवन मौर्य, लंका, वाराणसी
यह अश्लीलता
इंटरनेट पर उपलब्ध अश्लील सामग्री समाज पर उतना असर नहीं करती जितना टीवी पर दिखाए जाने वाले अश्लील विज्ञापन और कार्यक्रम करते हैं क्योंकि इंटरनेट की पहुंच उतनी नहीं है जितनी टीवी की है। टीवी पर दिखाई जाने वाली अश्लीलता से व्यक्ति और ज्यादा कुंठित और आपराधिक प्रवृत्ति का हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि टीवी के जरिए हम पर जो अश्लीलता का हमला किया जा रहा है उसे रोकने के प्रयास किए जाएं। नहीं तो हो सकता है कि आने वाले समय में इंटरनेट और टीवी पर परोसी जाने वाली अश्लीलता में कोई खास फर्क ही न रह जाए।
’प्रियंक द्विवेदी, भोपाल

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