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अस्थिरता की राजनीति

1990 के बाद राज्य में क्षेत्रीय दलों की सरकारें रहीं, जिसमें लालू-राबड़ी शासन के बाद 2005 में भाजपा के सहयोग से नीतीश सत्तासीन हुए।

अस्थिरता की राजनीति
नीतीश कुमार (Photo Credit – PTI)

बिहार जैसे पिछड़े राज्य में सतत राजनीतिक अस्थिरता का वातावरण कायम रहना अत्यंत दुखद है। हालांकि 1990 के बाद राज्य में क्षेत्रीय दलों की सरकारें रहीं, जिसमें लालू-राबड़ी शासन के बाद 2005 में भाजपा के सहयोग से नीतीश सत्तासीन हुए। मगर नीतीश सरकार की दूसरी पारी के ढाई साल बाद यह अस्थिरता का वातावरण कायम हो गया।

स्वाधीनता के बाद अधिकांश समय कांग्रेस की ही सरकार रही, लेकिन श्रीकृष्ण सिंह के बाद कोई सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी। ऐसे में, नए घटनाक्रम के तहत अगर नया गठबंधन आकार लेता है या पुराना कायम रहता है, तब भी 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के विधानसभा चुनाव में राज्य का मतदाता यह सवाल पूछेगा कि इस अस्थिरता का जिम्मेदार कौन है? नीतीश या भाजपा का शीर्ष नेतृत्व, क्योंकि इसका नुकसान अंतत: बिहार की जनता को हुआ।
मुकेश कुमार मनन, पटना</p>

बेहतर को तरजीह

गौरतलब है कि ऊंची कूद में कांस्य पदक जीतने वाले तेईस वर्ष के तेजस्विन के प्रदर्शन को नजरअंदाज कर राष्ट्रमंडल खेलों में चयन नहीं किया गया था। वे दिल्ली हाई कोर्ट में पहुंचे और कोर्ट की वजह से ऐन वक्त पर खेलों में प्रवेश मिला और देश के लिए पदक जीत लिया। भारतीय खेल संघों में आज भी पक्षपात, भाई-भतीजावाद, स्वार्थी राजनीति और दबाव को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

विभिन्न खेलो संघों में बैठे हुए जिम्मेदार चयनकर्ता अपने-पराए का भेद कर गुड़ गोबर करने में लगे हैं। खेल संगठनों के पदाधिकारियों को ’अंधा बांटे रेवड़ी, अपने अपने को दे’ वाली कुत्सित बीमारी से बाहर निकलना होगा। उन्हें अपना-पराया देखने के बनिस्बत, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को ही आधार बनाते हुए सर्वश्रेष्ठतम खिलाड़ियों का ही चयन करना चाहिए।
हेमा हरि उपाध्याय, उज्जैन

हंगामे का चलन

हमेशा ही विपक्ष अपने मतलब के लिए जब तब संसद की कार्यवाही को दिन दिन भर के लिए रोक देता है। इस तरह हर हंगामे पर जनता की करोड़ों रुपए की कमाई बर्बाद होती रही है। हर बार कहा जाता है कि संसद में महंगाई पर बहस चाहता है विपक्ष, पर खुद ही विपक्ष हंगामा भी खड़ा करता है। फिर आजकल तो तख्तियां लहरा कर, कागज आदि फेंक कर विपक्ष हर तरह से अनुचित व्यवहार करने लगा है। समझ नहीं आता है कि संसद में जो कुछ होता है, उसका असर देश भर में भी पड़ता है, यह विपक्ष क्यों नहीं समझता है। संसद की कार्रवाई हमेशा चलती रहनी चाहिए इससे देश भर का ही भला है।
एमएम राजावत राज, शाजापुर

शिक्षा की बुनियाद

मध्यप्रदेश के शिक्षा मंत्री ने ऐलान किया है कि राज्य में शिक्षकों की भर्ती हर वर्ष की जाएगी। शिक्षा के गुणात्मक विकास में यह पहल उपयोगी साबित हो सकती है। वर्ष 2018 में हुई शिक्षक भर्ती पात्रता परीक्षा में चयनित आवेदकों की भर्ती प्रक्रिया भी पूर्ण की जा रही है।

नई शिक्षा नीति में शिक्षकों के लिए तय किए गए मानकों के हिसाब से देश के सभी राज्यों में भर्ती की जानी चाहिए, तभी नई शिक्षा नीति का पूरा लाभ छात्रों को मिल सकेगा। शिक्षा के पाठ्यक्रम में नैतिक शिक्षा, खेल कूद, योग शिक्षा, सैन्य प्रशिक्षण आदि विषयों को भी शामिल किया जाना चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य छात्रों का सर्वांगीण विकास होना चाहिए। प्राथमिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
ललित महालकरी, इंदौर

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