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चौपाल: पार्टियां भी करें मदद

राजनीतिक दलों को चंदे के रूप में अच्छा-खासा मिलता है। ऐसे में पैसे की कमी का सवाल तो उठता नहीं है। कोरोना की आपदा कोई बहुत छोटी नहीं है, सारी दुनिया इससे पीड़ित है। बहुत से देशों के साथ ही हम पर भी कोरोना वायरस की बीमारी से आर्थिक संकट पैदा हो सकता है।

Author Published on: April 1, 2020 3:29 AM
कोरोना का प्रकोप मानवता के लिए ऐतिहासिक तो है ही, इसके कारण और भी कई इतिहास बनेंगे और परंपराएं टूटेंगी।

अनेक सांसद, विधायक अपनी निधि में से सहयोग राशि के साथ ही एक माह का वेतन भी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री राहत कोष के साथ ही अस्पतालों में दे रहे हैं। उद्योगपति, व्यापारी, हस्तियां, कर्मचारी-अधिकारी, आमजन व सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाएं भी राहत कोष में सहयोग कर रही है। राजनीतिज्ञों के साथ ही अब राजनीतिक दलों को भी इस दिशा में कदम उठाना चाहिए और मदद के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री राहत कोष में पैसे देने चाहिए।

राजनीतिक दलों को चंदे के रूप में अच्छा-खासा मिलता है। ऐसे में पैसे की कमी का सवाल तो उठता नहीं है। कोरोना की आपदा कोई बहुत छोटी नहीं है, सारी दुनिया इससे पीड़ित है। बहुत से देशों के साथ ही हम पर भी कोरोना वायरस की बीमारी से आर्थिक संकट पैदा हो सकता है। अर्थव्यवस्था की दयनीय स्थिति से चिंतित व दुखी होकर जर्मनी के हेसे राज्य के वित्तमंत्री थॉमस शॉफर ने आत्महत्या कर ली। हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहे और कोरोना की विपदा से हम ऊपर उठ सकें व देश स्वस्थ हो जाए, इसके लिए सरकार के साथ राजनीतिक दलों को भी योगदान करने के बारे में सोचना चाहिए।
’शकुंतला महेश नेनावा, इंदौर

समझें बंदी की गंभीरता
आज पूरी दुनिया कोविड-19 महामारी से जूझ रही है। जिन देशों ने इसे पूरी गंभीरता से नहीं लिया, उन देशों में मौत का तांडव देखने को मिल रहा है। कोविड-19 वायरस के कारण पूरी दुनिया में अब तक लगभग तैतीस हजार से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। भारत में इसके संक्रमण की शुरुआत होते ही भारत सरकार ने इसे गंभीरता से लिया, और 22 मार्च को शुरू हुई पूर्ण बंदी 14 अप्रैल तक कर दी गई। कोविड-19 के संक्रमण से लड़ने के लिए सरकार युद्ध स्तर पर प्रयास कर रही है और इस बात का भी ध्यान रख रही है कि लोगों को खाने-पीने के सामान और दवाइयों की दिक्कत न हो।

इसके लिए एक पुलिस, प्रशासन और समाज सेवी संस्थाएं सामान घर-घर तक पहुंचा रही हैं। लेकिन दुख की बात है कि सरकार के इतने प्रयासों के बाद भी लोग गंभीरता नही दिखा रहे हैं और बिना वजह घरों से बाहर निकल रहे हैं, फर्जी कॉल करके संक्रमण की झूठी सूचना दे रहे हैं, घर में पर्याप्त राशन होने के बाद भी पुलिस को कॉल करके राशन मंगा रहे हैं। कुछ जगहों पर मेडिकल स्टाफ, जो कि इस समय सबसे महत्त्वपूर्ण कड़ी है, के साथ दुर्व्यवहार की खबरें भी आ रही हैं जो अत्यधिक निंदनीय है। देश से इस महामारी खत्म करने के लिए इसके घातक परिणामों को समझ कर पूर्ण बंदी को अत्यधिक गंभीरता से लेने की जरूरत है, क्योंकि कोविड-19 वायरस के लिए अभी तक कोई दवा नही बनी है, केवल सामाजिक दूरी बना कर ही इससे बचा जा सकता है।
’सुनील कुमार सिंह, मेरठ

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