हादसों के ठिकाने

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सोमवार रात को हमीदिया अस्पताल में आग लगने से, खबर के मुताबिक, चार बच्चों की मौत हो गई, जबकि छत्तीस बच्चे गंभीर रूप से प्रभावित हैं।

हमीदिया अस्पताल में आग लगने से चार बच्चों की मौत।

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सोमवार रात को हमीदिया अस्पताल में आग लगने से, खबर के मुताबिक, चार बच्चों की मौत हो गई, जबकि छत्तीस बच्चे गंभीर रूप से प्रभावित हैं। बच्चों को बचाने के दौरान अस्पताल कि कुछ नर्स और स्टाफ भी गंभीर हालत में है। यह हादसा एक बार फिर इस बात को इंगित करता है कि सरकारें और प्रशासन किस तरीके से लापरवाही बरते हैं। बताया जा रहा है कि जिस वक्त और जहां आग लगी, वहां पर आग बुझाने वाले जरूरी उपकरण भी ठीक नहीं थे। वे सालों से बंद पड़े हैं, जिस पर अस्पताल प्रशासन ने गंभीरता से विचार नहीं किया।

यह विडंबना है कि घटनाएं घटने के बाद सरकारें खानापूर्ति के नाम पर केवल मुआवजे की घोषणाएं कर देतीं या जांच का आश्वासन देती हैं, लेकिन वास्तव में इस ओर कठोर कदम नहीं उठाए जाते है और यही कारण है कि यह देश में अलग-अलग समय पर ऐसी घटनाएं घटती रहती हैं। यह हादसा किसी छोटे शहर या कस्बे में नहीं, बल्कि प्रदेश की राजधानी में हुआ। इसमें हमने जिन मासूमों को खो दिया उन्हें तो वापस नहीं ला सकते, लेकिन हां इतना जरूर है कि भविष्य में इस प्रकार की घटना न घटे इसके लिए सरकार जरूरी और महत्त्वपूर्ण कदम उठाए, तभी हम देश के भविष्य को सुरक्षित रख सकते हैं।
’सौरभ बुंदेला, भोपाल

अस्पताल में आग

भोपाल के एक अस्पताल में बच्चों के वार्ड में शार्ट सर्किट से आग लग गई। कई बच्चे और कर्मचारी भी झुलस गए। कुछ बच्चों की स्थिति नाजुक बनी हुई है। चार बच्चों की मृत्यु हो गई है। 6 अक्तूबर को अहमदनगर (महाराष्ट्र) के सिविल अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष में शार्ट सर्किट से आग लग गई, जहां कोविड के मरीज भी भर्ती थे। वहां ग्यारह मरीजों की मौत हो गई।

पिछले कुछ समय में देश के कुछ अस्पतालों में आग की घटनाएं हुई हैं। जहां जान-माल का काफी नुकसान हुआ है। अस्पताल सरकारी हो या गैर-सरकारी, पूरी जवाबदेही अस्पताल प्रबंधन की ही होती है। साथ ही समय-समय पर सरकार का स्वास्थ्य विभाग वहां के रखरखाव के निरीक्षण हेतु जाता है। अस्पताल बहुत ही संवेदनशील जगह होती है, जहां मरीज बच्चे से लेकर असहाय तक भी भर्ती रहते हैं। अत: वहां की व्यवस्था चाक-चौबंद होनी चाहिए।

सरकारी निरीक्षण हो या गैर-सरकारी वह माकूल होना चाहिए। फिर सामान्य मरीज तो भगदड़ में बच कर निकल सकता है, पर गंभीर मरीजों का उस वक्त तो भगवान ही मालिक रहता है। अक्सर आग का कारण शार्ट सर्किट ही सुनने में आता है। अत: उसके रखरखाव पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। जो भी हो, अस्पताल में हर तरह की सुरक्षा पर अस्पताल प्रबंधन को ध्यान देते रहना चाहिए ताकि अनहोनियों को टाला जा सके।
’शकुंतला महेश नेनावा, इंदौर

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