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नापाक इरादे

आजादी के बाद से अब तक हम पाकिस्तान के साथ ‘शांति बनाए रखने के लिए’ दोस्ती की दरख्वास्त करते आए हैं लेकिन नतीजे में उससे हमें हमेशा आतंकी गतिविधियां, सरहद पर गोलीबारी, अशांति और कालांतर में युद्ध तक करने को मजबूर होना पड़ा है। इधर हम दोस्ती की बात करते हैं और उधर वह सीमा […]

आजादी के बाद से अब तक हम पाकिस्तान के साथ ‘शांति बनाए रखने के लिए’ दोस्ती की दरख्वास्त करते आए हैं लेकिन नतीजे में उससे हमें हमेशा आतंकी गतिविधियां, सरहद पर गोलीबारी, अशांति और कालांतर में युद्ध तक करने को मजबूर होना पड़ा है। इधर हम दोस्ती की बात करते हैं और उधर वह सीमा पर गोलीबारी बरकरार रखता है। कूटनीति हो या राजनीति अथवा विदेश नीति, हमारे भरसक प्रयासों पर वह हमेशा पानी फेरता रहा है।

पंजाब उसके पास भी है और हमारे पास भी। कश्मीर उसके पास भी है और हमारे पास भी। दुनिया की हर आधुनिक तकनीक उसके पास है और हमारे पास भी। क्षेत्रफल के हिसाब से तरक्की भी दोनों अपने-अपने तरीके से कर रहे हैं अंतर बस इतना है कि हम तरक्की के रास्ते पर दुनिया से कदम से कदम मिला क र चल रहे हैं और वह अपनी सारी शक्ति आतंकी गतिविधियों में गवां रहा है।

चाहता तो वह भी दुनिया में तरक्कीपसंद देश बन सकता था पर खुदा खैर करे। हमने तो बहुत कोशिशें कीं दोस्ती का हाथ बढ़ाने और दुनिया में साथ-साथ चलने की। पर उसे शायद यह सब मंजूर ही नहीं है। आखिर हम भी कब तक उससे दोस्ती की विनती करते रहेंगे? एक दिन तो मजबूूर होकर हमें भी र्इंट का जवाब पत्थर से देना पड़ेगा।

महेश नेनावा, गिरधर नगर, इंदौर 

 

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