चौपाल

चौपाल: सुधार की दरकार व यह मिसाल

विडंबना है कि कभी उच्च मूल्यों और प्रबल नैतिकता के लिए पहचाने जाते रहे हमारे समाज और परिवारों में अब इनकी कमी साफ दिखाई...

चौपाल: गांधी के मूल्य व सुस्ती के पीछे

र्कशील व्यक्ति भी यदि गांधी को भला-बुरा कहे तो आत्मग्लानि का शिकार हो जाता है।

चौपाल: अनुशासन की कसौटी

हमारे देश की राजनीति का स्तर इस हद तक गिर चुका है कि यहां अनुशासन तो किसी कोने में दुबका नजर आता है।

चौपाल: मेहनताने का हक

सन 1991 में निर्वाह मजदूरी अधिकार की अवधारणा सामने आई, लेकिन वर्तमान में विकासशील देशों में भी मजदूर वर्ग न्यूनतम आय से भी अभी...

चौपाल: किसान की मजबूरी

खस्ता आर्थिक स्थिति के कारण खेतों में पराली जलाना किसानों की मजबूरी है, क्योंकि पराली से निकलने वाले धुएं का पहला हमला दिल्ली पर...

चौपाल: जलवायु की सुध

दुनिया में पर्यावरण संरक्षण की योजनाएं ठप्प पड़ सकती हैं जिसकी सबसे ज्यादा मार विकासशील और पिछड़े देशों के नागरिकों पर पड़ेगी जो पहले...

चौपाल: जानने का हक

सवाल है और यह देश की जनता को जानने का हक भी है कि सरकार रिजर्व बैंक से बड़ी मात्रा में देश की आपातकालीन...

चौपाल: न्याय की गति

सरकार के रिकॉर्ड के अनुसार, सबसे ज्यादा लंबित मामले महाराष्ट्र, गुजरात और ओडिशा में हैं, जहां जजों की संख्या काफी कम है। वहीं करीब...

चौपाल: शिक्षा की बदहाली

बच्चों को जन्म से ही अंग्रेजी रटाने से हमें क्या हासिल हो रहा है? क्या हम उन्हें अपनी मातृभाषा में शिक्षा नहीं दे सकते...

चौपाल: चम्पा का जीवन

आज तीन चार दशक बाद नदी को नाला का स्वरूप देकर न केवल कूड़े-कचरे के स्वरूप में तब्दील कर दिया गया है, बल्कि एक...

चौपाल: कला का दायरा व सुनहरा दौर

फिल्म उद्योग के पूरी तरह व्यावसायिक होने से वे अच्छी कलात्मक फिल्मों का निर्माण कर फिल्मोत्सव में शामिल करने की सोच बहुत कम निर्मित...

चौपाल: मेहमानों की कब्रगाह व लोकतंत्र के लिए

संपादकीय ‘बदहाल झीलें’ पढ़ा। इस संदर्भ में अमर गीतकार दिवंगत शैलेंद्र का लिखा यह गीत याद आया- ‘मेहमां जो हमारा होता है, वो जान...

चौपाल: गण बनाम तंत्र व बदहाल उच्च शिक्षा

भारत के गण के तंत्र में आए खोट का आधार है राजनीति का खोट।

चौपाल: इंटरनेट की लत व रोजगार का सवाल

आज तेजी से बढ़ती तकनीक ने हमें बहुत कुछ दिया तो जरूर है, पर साथ ही बहुत कुछ हमसे छीना भी है।

चौपाल: प्रवासी पक्षियों पर संकट

एक समय था जब आंख खुलते ही कान में पक्षियों की मधुर ध्वनि सुनाई पड़ती थी। मगर समय ने आज हमें उन छोटे-छोटे पक्षियों...

चौपाल: सत्ता और सवाल

शिवसेना सोच रही थी कि इस बार हमारे हाथ वो नंबर लगा है कि जो पूरे महाराष्ट्र की राजनीति का संचालक हमें ही बना...

चौपाल: खतरे की घंटी व जायज विरोध

जेएनयू में पिछले कई दिनों से छात्र फीस बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं।

चौपाल: इंसाफ की राह व संकीर्ण मानसिकता

चीन जैसे देश में वहां की पुलिस किसी भी अपराधी को पकड़ने और हवालात या जेल में भेजने से पूर्व पूरी छानबीन करती है...

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