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चौपाल

भाजपा के रंग

केंद्र में भाजपा के सत्तारूढ़ होने पर दिल्ली में एक बहुत बड़ा परिवर्तन दिखाई दे रहा है। सभी सड़कों के किनारे और बीच के...

अनर्थ नीति

तवलीन सिंह ने ‘पिंड छुड़ाना होगा समाजवादी नीतियों से’ (23 नवंबर) टिप्पणी में समाजवादी नीतियों को कोसते हुए सफेद झूठ को परोसने का काम...

विकल्प की खोज

हमारे मुल्क में कानून के सामने क्या सभी नागरिक बराबर हैं? क्या सभी को सहज, सरल और सुलभ न्याय उपलब्ध है? कहीं हमारे देश...

सपनों के सौदागर

आमतौर पर तथाकथित बाबाओं के सत्संग में गरीब और कम पढ़े-लिखे लोग जाते हैं। यही बात नेताओं की सभाओं पर कुछ हद तक लागू...

फरेब का जाल

इस ‘रामपाल कांड’ ने देश और उसके विचारवान लोगों के सामने कुछ सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला सवाल राष्ट्र के सामाजिक सोच में...

ठगी के संत

पिछले दिनों तथाकथित संत रामपाल के आश्रम में जो कुछ हुआ वह बहुत शर्मनाक है, इससे पहले आसाराम बापू और निर्मल बाबा के कांड...

समय रहते

लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार कथित संत रामपाल को गिरफ्तार कर लिया गया। हरियाणा पुलिस की तारीफ करनी होगी कि उसने पूर्ण संयम का...

पतन का पाठ

अपने यहां शिक्षण संस्थान को पवित्रतम स्थानों में गिना जाता है। इसलिए हमने इसे विद्या का मंदिर कहना उपयुक्त समझा, पर शिक्षण संस्थानों में...

ठगी की चाल

हमारे देश में कई तथाकथित अपने नाम के आगे संत, धर्माचार्य, स्वामी आदि लगा कर विशिष्टता प्राप्त करते रहे हैं। समय आ गया है...

भ्रम के साए

उमाशंकर सिंह का ‘ध्यान भटकाने का मंत्र’ (4 अक्तूबर) और ब्रजेश कानूनगो का ‘सुनो कहानी’ (4 नवंबर), ये दोनों लेख पढ़े। इन लेखों का...

आस्था के सरोकार

बीरेंद्र सिंह रावत की टिप्पणी ‘आस्था की मुसीबत’ (समांतर, 7 नवंबर) पढ़ा। दिल्ली महानगर में लगता है कि आस्था जी का जंजाल बन चुकी...

इतना महिमामंडन

जब भी सरकारें बदलती हैं तब नई सरकारें यह दिखाने की कोशिश करती हैं कि वे जो करेंगी वह एकदम नया है, वही सही...

एकता की भाषा

हिंदी प्रचार-प्रसार संबंधी कई राष्ट्रीय संगोष्ठियों में मुझे शामिल होने का सुअवसर मिला है। इन संगोष्ठियों में अक्सर यह सवाल अहिंदी-भाषी हिंदी विद्वान करते...

मूल का प्रश्न

विवादास्पद बयानों के लिए जाने जाने वाले बिहार के मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने अब नया शगूफा छेड़ा है। हालांकि, बौद्धिक और अकादमिक दुनिया के...

उम्मीद का कोना

अक्सर ऐसी खबरें सामने आती रहती हैं कि किसी व्यक्ति ने लाखों रुपए के आभूषण या नकदी मिलने पर उसके मालिक को खोज कर...

पोषाहार या रोगाहार

मिड-डे मील योजना केंद्र और राज्यों की साझेदारी से चलती है। इसमें केंद्र की वित्तीय सहभागिता पचहत्तर फीसद है और राज्यों की पच्चीस फीसद।...

विचित्र विश्वास

जनसत्ता 17 नवंबर, 2014: महाराष्ट्र की अल्पमत सरकार का ढोंग पूरे देश के सामने आ गया। ‘गुड़ खाए और गुलगुले से परहेज’ की कहावत...

तुझे क्या

जनसत्ता 17 नवंबर, 2014: यह सुनने में अजीब लगता हैं कि ‘तुझे क्या!’ लेकिन इसका प्रयोग लोग जीवन में किसी न किसी संदर्भ में अक्सर...