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चौपाल

सब्सिडी का खेल

गैस सब्सिडी का खेल तुरंत बंद होना चाहिए। यह केवल तेल कंपनियों और राजनीतिक दलों के लाभ के लिए है न कि उपभोक्ताओं के...

साकी सरकार

देश में ‘अच्छे दिन’ के वादे पूरे होते कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। उलटे केंद्र और कई राज्यों की भाजपा सरकारें लोगों की...

खेल भावना कहां

क्रिकेट विश्व कप में भारत की पकिस्तान पर जीत को सभी टीवी चैनलों पर देख-सुन कर मेरे मन में एक शब्द उभर आया- ‘तौबा!’...

खुशामद की हद

अतिशयोक्तिपूर्ण बातें करना, सुनना, उनमें रस लेना और एक हद तक उनमें भरोसा करना लोक जीवन का अंग है। धार्मिक मामलों में इसकी जगह...

खुशी में गम

समाचारों से ज्ञात हुआ कि अमित शाहजी दिल्ली की हार से इतने दुखी हुए कि इसका प्रभाव उन्होंने अपने बेटे की शादी तक में...

जनता की जीत

बीते वर्ष चौदह फरवरी को केजरीवाल का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा और अब चौदह फरवरी को ही केजरीवाल का शपथ समारोह किसी फिल्म के...

बोया पेड़ बबूल

संपादकीय ‘अभद्रता का कारोबार’ (5 फरवरी) में सामाजिक-सांस्कृतिक पतन को रेखांकित करते हुए जो बातें कहीं हैं वे सही होते हुए भी इतनी सीमित...

आगे की राह

आखिरकार दिल्ली में सुनामी आ गई। जो टक्कर कांटे की दिख रही थी, वह मुकाबला-विहीन हो गई। अराजक, भगोड़ा और नक्सल के ठप्पे ने...

सहिष्णुता का संदेश

बराक ओबामा को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाने को केंद्र सरकार और भाजपा अपनी बड़ी उपलब्धि के तौर पर...

आंखिन देखी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, इसके आनुषंगिक संगठन और चेरी भारतीय जनता पार्टी सामाजिक और धार्मिक सहिष्णुता में भरोसा करते हैं, यह आरोप उन पर आज...

हमारी प्राथमिकता

जब से देश में ‘स्मार्ट सिटी’ का जुमला उछाला गया है बहुतेरों की बांछें खिली हुई हैं। ‘स्मार्ट’ का शाब्दिक अर्थ आकर्षक, बना-ठना, चतुर,...

किसकी खातिर

तीस जनवरी शहीद दिवस पर गांधीजी को श्रद्धांजलि देते हुए देश एक नई चुनौती से गुजरता दिखा। सरकारी विज्ञापन के जरिए हमारे संविधान से...

उतार पर जादू

पहले लोकसभा चुनाव, उसके बाद महाराष्ट्र, झारखंड और हरियाणा के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जीत दर्ज की और अपनी सरकार बनाई। इन सभी...

मोदी के नाम

राजनेताओं को उनकी वैचारिक संपदा, चरित्र और उनके सामाजिक योगदान के लिए याद करने का चलन रहा है। गांधीजी को सत्य-अहिंसा के पुजारी, साधनों...

कितने अच्छे दिन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आकलन का समय आ गया है। 250 दिनों से ज्यादा वक्त से रायसीना हिल्स पर उनका एकक्षत्र राज है। मोदी...

गूंगे का गुड़

अरुणेंद्र नाथ वर्मा की टिप्पणी ‘प्यार की बोली’ (दुनिया मेरे आगे, 4 फरवरी) पढ़ी। उन्होंने एक सार्थक संकेत किया है कि दिखावे के इस...

लोकतंत्र का तकाजा

यह हैरान-परेशान करने वाली बात है कि चुनावों को कैसे सिर्फ किसी व्यक्ति के प्रति जनमतसंग्रह में बदला जा रहा है। लगता है कि...

पुनर्विचार की दरकार

पटना के नारायणी कन्या विद्यालय को हटाए जाने की सूचना ने जितना उद्वेलित नहीं किया उससे कहीं ज्यादा उस वजह ने चोट पहुंचाई जो...