चौपाल Archives - Page 111 of 117 - Jansatta
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चौपाल

आतंक का दायरा

इस साल का सोलह दिसंबर विश्व इतिहास के एक सबसे शर्मनाक और दुखद दिनों में से एक माना जाएगा। बर्बरता और वहशीपन का जो...

समाज का चेहरा

जिस देश में नारी की पूजा होने के दावे दंभ के साथ किए जाते रहे हैं, वहीं आज महिलाओं को लगभग रोज छेड़खानी, अश्लीलता,...

ईमानदारी का मोल

संपादकीय ‘ईमानदारी की मिसाल’ (9 दिसंबर) पढ़ा। यह आज की संरचना में एक बड़ी परिघटना है। आए दिन घोटाले और भ्रष्टाचार की कहानी सामने...

राजनीतिक समीकरण

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जम्मू-कश्मीर की दोनों चुनावी रैलियां: एक श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम में और दूसरी राया मोड़ जम्मू में सफल ही नहीं,...

सितारा की याद

सितारा देवी भारतीय संगीत विद्या की एक ऐसी सितारा थीं, जिनके न होने से एक बड़ा खालीपन महसूस हो रहा है। सिर्फ कथक ही...

साफ सफाई

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जीवन में स्वच्छता के पक्षधर थे। उनका कहना था, ‘स्वच्छता आजादी से महत्त्वपूर्ण है।’ बापू के इस कथन से स्वच्छता के...

कथनी और करनी

चौपाल के अंतर्गत छपे ‘सुरक्षा के मोर्चे’ (8 दिसंबर) में शिबन कृष्ण रैणा का मत है कि जब उरी सेक्टर में गोलीबारी हो रही...

नापाक करतूत

जब भी पाकिस्तान किसी घरेलू मोर्चे पर विफल होता है तो वह कश्मीर का मसला जोर-शोर से उछाल कर अपनी विफलता को ढंकना चाहता...

धर्म की राजनीति

इतिहास से हमने यह सीखा कि हमने इससे कुछ नहीं सीखा! मध्ययुग में अरब और तुर्क आक्रमणकारी अपने धर्म का प्रचार करने के लिए...

भरोसे की बात

वर्षाजी ने अपनी टिप्पणी ‘प्रतिवाद के पायदान’ (जनसत्ता, 17 नवंबर) में संतुलित तरीके से बात कहने की कोशिश की है। इस विषय में कोई...

शिक्षा का सुध

अरमान की टिप्पणी ‘विषमता का पाठ’ (दुनिया मेरे आगे, 8 दिसंबर) में आमना जैसे बच्चों का या उनकी ओर से यह सवाल बिल्कुल सही...

सदन का काम

संसद के दोनों सदनों का कोई भी सत्र ऐसा नहीं जाता जिसमें बीस-पच्चीस प्रतिशत समय हंगामे की भेंट न चढ़े। विपक्ष में चाहे कोई...

प्रजातंत्र से खेल

प्रजातंत्र की नींव जागरूक मतदाता है। सुप्त मतदाताओं को जगाने के लिए ही शासन और समाज द्वारा अभियान चलाया गया- ‘पहले मतदान, फिर जलपान’...

क्रांतिकारी की याद

कुलदीप कुमार ने ‘अंदर की असमानता’ (निनाद, 30 नवंबर) में विख्यात क्रांतिकारी राजा महेंद्रप्रताप को याद किया है, भले ही वह अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय...

भ्रम की राजनीति

गिरिराज किशोर के लेख ‘अनिवार्य मतदान से फायदा या नुकसान’ (20 नवंबर) में जिस तरह अनिवार्य मतदान के संबंध में चिंता जाहिर की गई...

सुरक्षा के मोर्चे

जिस दिन उत्तरी कश्मीर (बारामूला जिले) के उरी सेक्टर की एक सैन्य छावनी पर पाक समर्थित आतंकियों के नापाक हमले को विफल करते हमारी...

भोपाल के सबक

विश्व की सबसे भयानक औद्योगिक त्रासदी के नाम से चर्चित भोपाल गैस रिसाव कांड को तीस साल पूरे हो गए। दो-तीन दिसंबर 1984 की...

हंगामा है क्यों बरपा

केंद्रीय मंत्री निरंजन ज्योति के अभद्र बयान पर बवाल खड़ा हो गया है। सालों-साल बीत जाते हैं सकारात्मक काम करते तो भी मीडिया इतना...