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चौपाल

एक ही रास्ता

तरुण विजय शब्द-सूरमा नहीं हैं। यह धारणा तब तो और पुख्ता होती है जब आप किशोरावस्था से उन्हें पढ़ते हुए बड़े हुए हों। लेकिन...

किसान विरोधी कौन

हमारे सचमुच के महान प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्रीजी ने उचित नारा दिया था ‘जय जवान जय किसान।’ उनके बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने नारा...

प्रदूषण के पीछे

दिल्ली की हवा को साफ-सुथरा रखने के लिए राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने डीजल के दस साल और पेट्रोल के पंद्रह साल पुराने सभी...

बदहाल किसान

राहुल गांधी इन दिनों किसानों के लिए बहुत चिंतित नजर आ रहे हैं। देश की सत्ता लगभग अट््ठावन साल तक कांग्रेस के पास रही।...

कांग्रेस का सपना

सोलहवीं लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी। पार्टी नेताओं की सबसे ताकतवर कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में सोनिया और राहुल गांधी...

नेताजी के बहाने

नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मृत्यु हवाई जहाज दुर्घटना में हुई या वे अन्य तरह की अज्ञात परिस्थितियों में संसार से विदा हुए, यह बात...

सत्ता की खातिर

लगभग अड़तीस साल पहले कांग्रेस को परास्त करने के लिए उस समय के कांग्रेस विरोधी दलों ने विलय किया, लेकिन घटक दलों के नेताओं...

किसानों की खातिर

अप्रैल महीने की प्रतीक्षा हमारे देश के किसान बड़ी बेसब्री से इस उम्मीद में करते हैं कि उनकी फसलें खलिहान से घर तक पहुंचेंगी।...

सपनों के सौदागर

लोकसभा चुनाव 2014 में बात सिर्फ सत्ता परिवर्त्तन की नहीं थी। बात थी सपनों, आशाओं और अच्छे दिनों की। चाहे उत्तर प्रदेश हो या...

काले धन पर लगाम

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के मुताबिक काले धन की वापसी का मुद््दा महज एक आकर्षक चुनावी जुमला था। इससे समझा जा सकता है कि...

किसानों की सुध

तमाम औद्योगिक विकास के बावजूद आज भी भारत एक कृषि प्रधान देश है। हमारे यहां जय जवान-जय किसान का नारा खूब लगाया जाता है।...

उपेक्षित कश्मीरी पंडित

कश्मीर मुद्दे को लेकर भारत-पाक वार्ता का जब-जब दौर चलता है या चलने वाला होता है तो यह मान लिया जाता है कि कश्मीर-समस्या...

युवाओं के भरोसे

इन दिनों अलग-अलग जगह जाकर कई युवाओं से मिलने का अवसर मिला। सभी ने देश-दुनिया को बदल देने के अपने-अपने तरीके बताए। किसी ने...

विकास ही विकास

आस्तिक कहते हैं कि भगवान के अनेक रूप हैं, जो जिस रूप में देखना चाहे उसे उसी रूप में दर्शन हो जाते हैं। जिस...

श्रमिकों से छल

दिल्ली के श्रममंत्री गोपाल राय ने बड़े जोर-शोर से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मजदूरों के वेतन में बढ़ोतरी का ऐलान किया। अब अकुशल श्रमिकों के...

क्रिकेट का हश्र

पांच अप्रैल को रविवारी में प्रकाशित हरीश त्रिवेदी की दिलचस्प विवेचना ‘क्रिकेट और प्रेमचंद’ ने फिर साबित कर दिया कि प्रेमचंद कितने यथार्थवादी और...

ढोल की पोल

यह सर्वविदित है कि जब कोई पार्टी सत्ता में होती है तो उसके मापदंड अलग होते हैं और जब विपक्ष में होती है तो...

गांधी के साथ

रघु ठाकुर का लेख ‘गांधी-निंदा के नए प्रयोग’ (3 अप्रैल) बहुत अच्छा है। यह जरूरी भी था। काटजू साहब हलके नहीं हैं, थोड़े मूडी...