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चौपाल

रिक्शे का सफर

राजेंद्र रवि की अखिल भारतीय छात्रसंघ में शामिल होने से लेकर ‘रिक्शे के साथ’ (23 जून) खड़े होने तक की विचार यात्रा पढ़ कर...

वक्त की मार

साठ के दशक की बात है। पीतकाक यानी पीतांबर पान वाले को हब्बाकदल पुल (कश्मीर) के इस पार या उस पार रहने वाला मेरी...

सियासत की किताब

किताब लिखने की राजनीति की शृंखला में एक और पूर्व नौकरशाह ने चौबीस साल बाद कंधार और गुजरात के दंगों पर नमक छिड़क दिया।...

पहले का प्रश्न

तवलीन सिंह का लेख ‘मानसिकता पर सवाल’ (12 जुलाई) पढ़ा। तवलीन सिंह एक अच्छी लेखिका हैं, लेकिन अपने इस लेख में व्यक्त उनके विचार...

चीन का रुख

चीन भारत का कभी दोस्त तो रहा ही नहीं, यह एक नहीं, कई बार प्रमाणित हो चुका है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीनी राष्ट्रपति...

लाचार बचपन

बच्चे हमारे सबसे मूल्यवान प्राकृतिक संसाधन हैं। उनके द्वारा उस समाज को आगे बढ़ाया जाना है जिसमें उनका पालन हो रहा है, जिसमें उनका...

सत्ता का नशा

मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के बड़े नेता रहे हैं, लगता है आज उनकी शक्ति, आभा और राजनीतिक क्षमताओं को ग्रहण लग गया है...

कथनी और करनी

हाल ही में दिल्ली सरकार ने अपना बजट जारी किया है। बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाओं पर खर्च करने के...

समानता के बिना

आजादी के बाद समय ज्यों-ज्यों बीतता गया, समाज में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और जाति और धर्म का बोलबाला बढ़ता गया। समाज में गरीब और अमीर...

कितने और

जिस तरह व्यापम घोटाले से जुड़े लोगों की मौत हो रही है, उसी प्रकार आसाराम पर लगे आरोपों के गवाहों की लगातार हत्या कराई...

अधूरी बात

देश की गुप्तचर संस्था ‘रॉ’ के पूर्व मुखिया एएस दुलत ने अपनी किताब में 2002 के दुर्भाग्यपूर्ण दंगों का तो जिक्र किया, लेकिन वह...

आंबेडकर के बहाने

आज देश के लगभग सभी राजनीतिक दल अपने को आंबेडकर का प्रबल समर्थक सिद्ध करने की होड़ में लगे हैं, लेकिन वे बार-बार उनके...

अवरोध और विरोध

कला जगत मानो परम शोक की अवस्था से गुजर रहा है। पुणे के भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान पर गजेंद्र चौहान की महाभारतीय छाया...

वापसी का प्रश्न

पिछले दिनों ‘विश्व-शरणार्थी दिवस’ पर विस्थापित कश्मीरी पंडितों ने देश में जगह-जगह प्रदर्शन किए। उन्होंने अपने लिए अलग ‘होमलैंड’ की मांग दोहराई मगर अभी...

कड़वा सच

‘सेल्फी विद डाटर’ का प्रधानमंत्री का सुझाव स्वागतयोग्य है। लेकिन लड़कियों के अनुपात में कमी के मूल कारणों की तरफ देखना और इन्हें दूर...

शोषण का श्रम

हरियाणा के र्इंट भट्ठा उद्योग में 20-25 सालों तक काम करने पर भी मजदूरों के लिए कोई सामाजिक सुरक्षा की गारंटी नहीं है। महज...

धूमिल सपने

सौ में सत्तर आदमी फिलहाल जब नाशाद हों /दिल पर रख कर हाथ कहिए देश क्या आजाद है? लगभग चार दशक पहले यह सवाल...

प्रकृति की पाठशाला

मनुष्य प्रकृति के बीच जन्म लेता है और प्रकृति ही उसे पुन: रचती है। इसीलिए प्रकृति बार-बार अपनी ओर मनुष्य को खींचती रही है।...