चौपाल Archives - Page 100 of 117 - Jansatta
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चौपाल

आलोचना से परहेज

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा का अरुण शौरी के संदर्भ में कहना है कि ‘बहुत से लोग अच्छे समय में मित्र होते हैं। जब चीजें...

परउपदेश कुशल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थ लोगों से रसोई गैस सब्सिडी छोड़ने की अपील करना ऊपरी तौर पर तो सराहनीय लगता है पर उसका व्यापक...

पढ़ाई का परिवेश

अमेरिकी शहर न्यूयार्क की घटना हमारे शिक्षा-व्यवस्था के कर्णधारों को आईना दिखाने के लिए पर्याप्त है। स्कूल में पढ़ने वाले एक बच्चे के माता-पिता...

हार के बाद

सन 2004 से 2014 तक यानी करीब दस सालों तक राहुल गांधी गहरी नींद में सो रहे थे, जब गरीब किसानों का खून चूसने...

कथनी बनाम करनी

प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी अपनी जिम्मेदारी के अनुरूप आचरण करते नहीं दिखते। प्रसिद्धि की भूख में वे तरह-तरह के नारे देते हैं।...

गंदगी और सफाई

लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशों में देश की छवि धूमिल करने की कसम खा रखी है। उन्होंने कनाडा में भारत को घोटालों...

पूंजी की सत्ता

इस साल के बजट से शीशे की तरह साफ है कि हमारे वर्ग-विभाजित समाज में सरकार किस वर्ग के हित में कार्यरत है और...

Nepal Earthquake: यह सबक

नेपाल के प्रलयंकारी भूकम्प ने हम मनुष्यों को कुछ सबक सिखाए हैं। कुदरत पूरी तरह से, सही मायने में सेक्युलर है। हिंदू, मुसलिम, सिख,...

मूल्यों की शिक्षा

सय्यद मुबीन जेहरा ने ‘पढ़ाई में भटकाव के रास्ते’ (समांतर संसार, 12 अप्रैल) में जिस चिंता और सरोकारों के साथ बात कही है वह...

संकट की दस्तक

जल ही जीवन है। बिना जल के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती लेकिन अफसोस की बात है कि कुदरत की इस...

आत्ममुग्धता की उड़ान

लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों ने राहुल गांधी को ठीक समय पर, ठीक बात पर रोका-टोका। राहुल गांधी की बातों से लग...

गजेंद्र के बहाने

राजस्थान के किसान गजेंद्र सिंह की आत्महत्या अब तक हुई अनेक आत्महत्याओं के क्रम में ‘एक और’ नहीं है, बल्कि इसमें यह संदेश अंतर्निहित...

खेती का संकट

शीतला सिंह ने ‘कृषि संकट की जड़ें’ (19 अप्रैल) लेख में खेती-किसानी पर आए संकट का सतही विश्लेषण किया है। इतना ही नहीं, उन्होंने...

दिखावे की राजनीति

भाजपा के एक सांसद साइकिल से संसद पहुंचे। क्या वे हमेशा संसद जाने के लिए साइकिल का प्रयोग करेंगे? क्या यह पूर्व की तरह...

पढ़ाई का पैमाना

जब अमेरिका, इंग्लैंड जैसे देशों की कोई प्रतिष्ठित पत्रिका शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग जारी करती है तब हमारा प्रबुद्ध वर्ग मातम मनाने लगता है।...

जरूरत और लालच

‘अरावली के जख्म’ संपादकीय (21 अप्रैल) जिस चिंता को व्यक्त करता है वह सर्वव्यापी और सर्वग्रासी है। क्या जब सभी नदियां सूख जाएंगी या...

एक ही रास्ता

तरुण विजय शब्द-सूरमा नहीं हैं। यह धारणा तब तो और पुख्ता होती है जब आप किशोरावस्था से उन्हें पढ़ते हुए बड़े हुए हों। लेकिन...

किसान विरोधी कौन

हमारे सचमुच के महान प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्रीजी ने उचित नारा दिया था ‘जय जवान जय किसान।’ उनके बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने नारा...