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महंगाई का इंधन

देश के अनेक हिस्सों में पेट्रोल के दाम प्रति लीटर सौ रुपए के आसपास या इससे अधिक पहुंच गया है। इसी तरह डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ते जा रहे हैं।

Author Updated: February 23, 2021 7:15 AM
petrolसांकेतिक फोटो।

कई महीनों से हमारी अर्थव्यवस्था महामारी और मुद्रास्फीति से त्रस्त है। अब जब धीरे-धीरे आर्थिक मोर्चे पर सकारात्मक रुझान दिखने लगे हैं, तो पेट्रोल और डीजल का महंगा होना हमें मुश्किल में डाल सकता है, क्योंकि मुद्रास्फीति को काबू करना आसान नहीं होगा। तेल की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का असर होता है, जिस पर सरकार और कंपनियों का नियंत्रण नहीं है।

इसके अलावा, केंद्र और राज्य सरकारों के कराधान से भी बढ़ोतरी होती है। पेट्रोल की कीमतों में राज्य सरकारों के करों का हिस्सा लगभग 61 प्रतिशत और डीजल में 56 फीसदी से ज्यादा है। ऐसे में केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण का यह सुझाव व्यावहारिक प्रतीत होता है कि केंद्र और राज्य सरकारें अपनी सहमति से अपने-अपने करों में कुछ कटौती करें या छूट दे, ताकि ग्राहकों को लाभ मिल सके। सरकारों को सबसे अधिक, एक तिहाई से अधिक, अप्रत्यक्ष कर पेट्रोलियम उत्पादों से ही प्राप्त होता है। इस कर की वसूली भी आसान होती है और इसमें चोरी और छिपाने की गुंजाइश भी कम रहती है।

इसका दूसरा पहलू यह है कि हमारे कुल निर्यात में पेट्रोलियम पदार्थों का हिस्सा भी एक तिहाई के आसपास है। हम अपनी उर्जा जरूरतों के लिए मुख्य रूप से आयात पर निर्भर हैं। इसलिए स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की लगातार कोशिश हो रही है, पर पेट्रोलियम पदार्थों पर निर्भरता कम करने में अभी समय लगेगा। ऐसी स्थिति में सरकारी करों के बारे में एक ठोस समझ बनाने की जरूरत है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में गिरावट हो तो उसका खुदरा फायदा ग्राहकों को भी मिले। इससे कीमतों के बढ़ने पर ग्राहकों को शिकायत नहीं रहेगी।

यह मांग भी उठती रही है कि पेट्रोल, डीजल आदि उत्पादों को भी वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली के तहत लाया जाए। लेकिन इसके लिए भी केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहमति बनानी होगी। किसी भी सरकार के लिए राजस्व को छोड़ना आसान नहीं है। केंद्र और राज्य सरकारों ने कोरोना महामारी से बचाव और आर्थिकी में अनेक प्रयास किए हैं। इसी कड़ी में उन्हें तेल की कीमतों में राहत देने के लिए भी पहल करनी चाहिए, ताकि मंहगाई से अर्थव्यवस्था को नुकसान न हो।
’भूपेंद्र सिंह रंगा, हरियाणा

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