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चौपालः पाक पर नकेल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने करीब 16 अरब 26 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता रोक कर पाकिस्तान को साफ संदेश दिया है कि आतंकवाद से निपटने के मामले में वह गंभीरता नहीं दिखा रहा है और अमेरिका को पिछले पंद्रह साल से मूर्ख बना रहा है।

Author January 6, 2018 2:48 AM
ट्रंप का पाक के खिलाफ कठोर कदम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने करीब 16 अरब 26 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता रोक कर पाकिस्तान को साफ संदेश दिया है कि आतंकवाद से निपटने के मामले में वह गंभीरता नहीं दिखा रहा है और अमेरिका को पिछले पंद्रह साल से मूर्ख बना रहा है। पिछले पंद्रह सालों में अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए पाकिस्तान को 33 अरब डॉलर सैन्य सहायता दे चुका है। आर्थिक मदद रोकने के बाद पाकिस्तान पर इसका क्या असर पड़ेगा और वह आतंकवाद के खिलाफ कोई कदम उठाएगा या नहीं, अभी यह स्पष्ट नहीं है। फिलहाल यह जरूर कहा जा रहा है कि अपनी घटती लोकप्रियता से फिक्रमंद होकर ट्रंप ने ऐसा फैसला लिया है ताकि अमेरिकी जनता का बड़ा वर्ग इससे खुश हो और दुनिया में उनकी वाहवाही हो। इसी कड़ी में कुछ समय पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से जारी राष्ट्रीय नीति में कहा गया था कि हम पाकिस्तान पर आतंकवादियों को खत्म करने के प्रयासों में तेजी लाने का दबाव डालेंगे क्योंकि किसी भी मुल्क का आतंकवादियों और उनके समर्थकों के लिए कोई योगदान नहीं हो सकता है।

ट्रंप के बयान के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि अमेरिका अफगानिस्तान की लड़ाई के लिए पाकिस्तान के संसाधनों का इस्तेमाल करता है और उसी की कीमत चुकाता है। उनके मुताबिक ट्रंप अफगानिस्तान में हार से दुखी हैं और इसलिए पाकिस्तान पर दोष मढ़ रहे हैं। बावजूद इसके इन दिनों पाकिस्तान में हड़कंप मचा हुआ है। हाफिज सईद पर अचानक सख्त होते हुए वहां की वित्तीय नियामक संस्था प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (एसईसीपी) ने जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन के चंदा लेने पर प्रतिबंध लगा दिया है जबकि इसी हाफिज सईद को पिछले महीने ही अदालत ने बरी किया था।

बहरहाल, ट्रंप की आर्थिक मदद रोकने की घोषणा के एक दिन बाद चीनी विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ बेहतरीन काम कर रहा है और विश्व समुदाय को उसका समर्थन व सहयोग करना चाहिए। इधर भारत को अमेरिका और पाकिस्तान के बीच की हालिया बयानबाजी से खुश होने की जरूरत नहीं है। चीन और पाकिस्तान के बढ़ते रिश्ते भारत के लिए चिंता का विषय है। इसके बारे में भारत को अपनी तैयारी रखनी होगी। अमेरिका पर कोई भरोसा नहीं किया जा सकता। आर्थिक और सामरिक सौदों के कारण फिलहाल भारत अमेरिका के लिए फायदेमंद है लेकिन कल अगर अफगानिस्तान या पाकिस्तान उसके लिए ज्यादा मुफीद साबित हुए तो यह समीकरण बदल भी सकता है। अमेरिका ने तो सिर्फ दबाव बनाने का पैंतरा मात्र दिखाया है।

वास्तविकता यह है कि पाकिस्तान अमेरिका के लिए पारंपरिक रूप से महत्त्वपूर्ण देश रहा है और आगे भी रहेगा। अमेरिका दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकना चाहता है तो कभी-कभी वह भारत को खुश करने वाली बातें कर लेता है, मगर कार्रवाई कुछ नहीं करता। बेहतर यही है कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों को मजबूत बनाने के सार्थक प्रयास करे। नेपाल की वर्तमान सरकार को भी साधना जरूरी है क्योंकि उसका ज्यादा झुकाव चीन की तरफ है। चीन, श्रीलंका, बांग्लादेश व म्यांमा में भी अपना दबदबा बढ़ाने की कोशिशों में जुटा है। अफगानिस्तान पर भी चीन की नजर गड़ी दिखाई दे रही हैं। ये सारी स्थितियां भारत के हित में नहीं हैं।
’कुशाग्र वालुस्कर, भोपाल, मध्यप्रदेश

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