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चौपालः गठबंधन का गणित

कांग्रेस का सपा से एक चौथाई सीटों पर गठबंधन कर लेना अनसुलझी पहेली है। आखिरकार ऐसी क्या मजबूरी बन गई कि कांग्रेस पार्टी को अपना ओहदा इतना गिराना पड़ गया है कि शुरुआत के चार दशकों में राज्य की सत्ता में रही पार्टी को एकाएक ऐसा फैसला लेना पड़ा!

Author Published on: January 25, 2017 3:16 AM

कांग्रेस का सपा से एक चौथाई सीटों पर गठबंधन कर लेना अनसुलझी पहेली है। आखिरकार ऐसी क्या मजबूरी बन गई कि कांग्रेस पार्टी को अपना ओहदा इतना गिराना पड़ गया है कि शुरुआत के चार दशकों में राज्य की सत्ता में रही पार्टी को एकाएक ऐसा फैसला लेना पड़ा! कांग्रेस ने राज्य की 403 सीटों में से महज 105 सीटों में संतोष कर लिया। उसे अपने विपक्षी जूनियर अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में स्वीकार करना पड़ा। शायद कांग्रेस को 2014 लोकसभा चुनाव के परिणाम से गहरा आघात पहुंचने के साथ ही अपने राजनीतिक पतन के दिन दिखने लगे थे।  कांग्रेस के ‘सत्ताईस साल यूपी’ बेहाल के नारे का क्या होगा? ऐसे तो पार्टी को भविष्य में जनता के बीच विश्वसनीयता के संकट का भी सामना करना पड़ सकता है। क्या यह गठबंधन केवल एक खास वर्ग को बहलाने के लिए किया गया है? वजह कोई भी रही हो पर कांग्रेस के लिए यह गठबंधन अपने पैर में कुल्हाड़ी मारने जैसा है।

अब क्या मुंह लेकर राहुल गांधी और पार्टी के अन्य कार्यकर्ता जनता के बीच जाएंगे? क्या यह गठबंधन कांग्रेस के भविष्य के लिए बेहतर साबित होगा? इसमें कांग्रेस के साथ ही सपा की भी परीक्षा होगी। क्या लोग इतनी जल्दी सपा पर लगे बदहाल कानून व्यवस्था और बलात्कार प्रदेश के धब्बे को भुला देंगे? क्या महज तीन महीने में अखिलेश की छवि जनता के मन में साफ हो गई है? क्या हाल में चले सपा के नाटकीय आंतरिक कलह के दिखावे से जनता के मन में पार्टी की नकारात्मक छवि नहीं बनी है? क्या यह पारिवारिक सियासी झगड़ा जनता के हित के लिए चल रहा था? क्या अखिलेश राज्य की जनता को घी और दूध के पैकेट की चुनावी घोषणा कर बहलाने में कामयाब हो पाएंगे?

मौजूदा हालात में यह कहना बिल्कुल नाकाफी नहीं होगा कि इन राजनीतिक दलों के दोहरे चरित्र इन्हीं के लिए घातक साबित हो सकते हैं। बहरहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि इस गठबंधन से ज्यादा नुकसान कांग्रेस को होगा या सपा को। आखिर में एक सवाल और। क्या राहुल-अखिलेश की जोड़ी उत्तर प्रदेश में भाजपा को आने से रोक पाएगी?
’अभिषेक तिवारी, रायबरेली, उत्तर प्रदेश

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