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चौपालः अलगाववादियों को कवच

सुना है, कश्मीर में अलगाववादियों को सरकार सुरक्षा प्रदान करती है। यानी जो देश-विरोधी गतिविधियों में संलिप्त हैं, उन्हें सरकार की तरफ से प्रश्रय मिला हुआ है।

Author August 10, 2016 3:01 AM

सुना है, कश्मीर में अलगाववादियों को सरकार सुरक्षा प्रदान करती है। यानी जो देश-विरोधी गतिविधियों में संलिप्त हैं, उन्हें सरकार की तरफ से प्रश्रय मिला हुआ है। क्या यह कोई चाणक्य या विदुर नीति है या फिर कोई मजबूरी? विडंबना देखिए, एक तरफ हम इन अलगाववादियों की बदजुबानी सह रहे हैं और दूसरी तरफ सरकारी खर्चे से इन देश-दुश्मनों को सुरक्षा भी मुहैया करा रहे हैं। विश्व में शायद ही किसी देश में ऐसा होता हो!

एक सूचना के मुताबिक कश्मीर में अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा पर सालाना औसतन एक सौ बारह करोड़ रुपए खर्च होते हैं। इस खर्च में उनकी दिल्ली यात्राएं भी शामिल हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार जम्मू-कश्मीर सरकार ने इन अलगाववादियों के रखरखाव, सुरक्षा, यात्रा, स्वास्थ्य आदि पर पिछले सालों के दौरान पांच सौ साठ करोड़ रुपए खर्च किए हैं। एक अन्य आंकड़े के अनुसार इन अलगाववादियों के पोषण में सरकार प्रतिमाह लगभग दस करोड़ रुपए खर्च करती है।

सुनने में यह भी आया है कि अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा में निजी अंगरक्षकों के रूप में लगभग पांच सौ और उनके आवासों पर सुरक्षा गार्ड के रूप में लगभग एक हजार जवान तैनात हैं। पूरे प्रदेश के बाईस जिलों में लगभग छह सौ सत्तर व्यक्तियों को विशेष सुरक्षा दी गई है। इनमें से दो सौ उनचास गैर-सूचीकृत लोग हैं। इन गैर-सूचीकृत व्यक्तियों में अलगावादियों को भी शामिल किया गया है। सुरक्षा प्राप्त लगभग चार सौ अस्सी लोगों को पांच साल में सात सौ आठ वाहन उपलब्ध कराए गए। सूचना यह भी है कि पांच सौ पीएसओ और साढ़े लौ सौ राज्य पुलिस के जवान इनकी सुरक्षा में लगे रहते हैं, जिससे इन्हें आतंकवादियों से बचाया जा सके और ये अलगाववादी सुरक्षित रह कर मजे से कश्मीर के लोगों को भारत सरकार और सुरक्षा बलों के विरुद्ध भड़काते रहें!

समय आ गया है, जब सरकारी खर्च से किसी को सुरक्षा देने के मानक तय हों। कश्मीर में शायद ये मानक अलगाववादियों ने तय कर लिए हैं! टैक्स देने वालों की गाढ़ी कमाई का पैसा इस तरह बर्बाद न हो, इस पर विचार करने की सख्त जरूरत है।
’शिबन कृष्ण रैणा, अलवर

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