ताज़ा खबर
 

चौपालः विज्ञान और हम

जब भी दुनिया में कोई नई खोज होती है, निस्संदेह वह सभी को उत्साहित करती है।

Author September 9, 2016 3:36 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर

जब भी दुनिया में कोई नई खोज होती है, निस्संदेह वह सभी को उत्साहित करती है। फिर खयाल आता है कि पिछले अठासी वर्षों में (सर सीवी रामन की खोज के बाद) हमारा काम सिर्फ तालियां बजाने तक सीमित क्यों रह गया है? क्या इसलिए कि हम लोग विज्ञान की तरक्की के बजाय खुद अपनी तरक्की के मकड़जाल में उलझे रहते हैं? क्या इसलिए कि हम अपने से काबिल लोगों को खिलने से पहले कुचल देते हैं? क्या इसलिए कि हम वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में भी असरदार लोगों के बच्चों को वरीयता देते हैं?

इस पर एक शोध होना चाहिए ताकि हम सिर्फ ताली बजाने तक सीमित न रहें अथवा यह कह कर खुद की पीठ न थपथपाते रहें कि हमारे युवक-युवतियां विदेशों में अपनी काबिलियत का परचम लहरा रहे हैं। वक्त आ गया है कि अब अपनी धरती पर भी ऐसी सफलताएं दर्ज की जाएं और विदेशी भी हमारी उपलब्धियों पर तालियां बजाएं! दरअसल, ये तालियां आम आदमी नहीं बल्कि हमारे वे वैज्ञानिक बजाते हैं जो विदेशों में अर्जित ऐसी उपलब्धियों पर देश भर में भाषण देने के लिए हवाई सफर करते हैं।

मुझे इस संदर्भ में एक घटना याद आ रही है। एक बार एक वैज्ञानिक भाषण दे रहा था। उसने बताया कि एंडरसन ने यह किया, पालोव ने वह किया, तुशिआका ने यह किया, चिंग पिंग ने वो किया। जब वह काफी देर तक दूसरों का काम बताता रहा तो वहां बैठे विभाग के मुखिया ने पूछा, ‘बहुत सुन लिया; आप अब यह बताइए कि आपने क्या किया?’ खैर, किया तो उस मुखिया ने भी कुछ खास नहीं था लेकिन सवाल तब भी वाजिब और मौजूं था और आज भी है।
’सुभाष चंद्र लखेड़ा, द्वारका, दिल्ली

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App