ताज़ा खबर
 

चौपालः मंदी की मार

इन दिनों सऊदी अरब आर्थिक मंदी की मार झेल रहा है। इस मंदी का असर वहां कार्यरत भारतीय मजदूरों पर भी पड़ा है।

Author August 5, 2016 3:04 AM
(File Photo of Saudi)

इन दिनों सऊदी अरब आर्थिक मंदी की मार झेल रहा है। इस मंदी का असर वहां कार्यरत भारतीय मजदूरों पर भी पड़ा है। अपनी नौकरी गंवाने के बाद वे बदहाली का जीवन जीने पर मजबूर हैं। इधर भारत सरकार ने सऊदी अरब में उनके अनिश्चित भविष्य को देखते हुए उन्हें भारत वापस लाने का निर्णय लिया है। सरकार ने करीब दस हजार भारतीय मजदूरों को एयरलिफ्ट करने का फैसला किया है। गौरतलब है कि पिछले एक साल से लगातार तेल की गिरती कीमतों के कारण सऊदी सरकार मुश्किलों का सामना कर रही है। इससे वहां की स्थानीय निर्माण कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है, जिसके कारण कुछ कंपनियां अपने विदेशी मजदूरों को वेतन देने में असमर्थ साबित हो रही है। स्थिति ऐसी गंभीर हो चुकी है कि विदेशी कामगारों के पास अपना पेट भरने और स्वदेश वापसी के लिए टिकट का इंतजाम करने तक के पैसे नहीं हैं। प्रवासी भारतीयों की यह दयनीय हालत सऊदी अरब की वर्तमान कार्मिक स्थिति को बताने के लिए काफी है। कई कर्मचारियों का तो वहां सात महीने से एक साल तक के वेतन का भुगतान नहीं हुआ है। इसके विरोध में कई बार विदेशी कर्मचारी प्रदर्शन भी कर चुके हैं, पर कोई सुनवाई नहीं हुई है।

यह पहला वाकया नहीं है जब वहां कार्यरत विदेशी कामगारों के साथ ऐसा बर्ताव हुआ हो। ऐसे मामले वहां आम हैं। वहां भारतीय मजदूर कई प्रकार के शोषण का शिकार होते हैं। प्रवासियों के अनुसार बिना किसी अतिरिक्त राशि के वहां कामगारों को लगातार पंद्रह से अठारह घंटे तक बिना किसी दिन छुट्टी के हर रोज कार्य कराया जाता है। वेतन के अतिरिक्त भी वहां विदेशी अनेक तरह की समस्याओं से घिरे रहते हैं। मसलन, अनुबंध की अवधि पूरी होने पर भी हवाई टिकट न देना, जबरन वीजा और पासपोर्ट रख लेना, समय पर श्रम कार्ड का नवीनीकरण न करना आदि। देखा जाए तो सऊदी अरब मुख्यत: विदेशी कामगारों पर ही आश्रित है। सऊदी अरब में मजदूरों और कामगारों का वर्गीकरण उनकी राष्ट्रीयता के आधार पर किया जाता है। इतना ही नहीं, यहां विदेशी कामगारों के साथ दुष्कर्म और शारीरिक शोषण के मामले भी सामने आए हैं। इसके अलावा सऊदी अरब में धार्मिक कट्टरता भी एक मुख्य समस्या है। एक अंतरराष्ट्रीय संस्था ‘मून राइट्स वाच’ इन परिस्थितियों को ‘नियर स्लेवरी’ यानी करीब-करीब दासता या गुलामी जैसी ही व्यवस्था के रूप में परिभाषित करती है। सऊदी अरब के अंदर और साथ ही साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ऐसी स्थितियों की भर्त्सना की जाती रही है।

बहरहाल, भारतीय कामगारों और मजदूरों को भारत सरकार ने एयरलिफ्ट करने का फैसला तो कर लिया है पर बड़ा सवाल है कि उनके बकाया वेतन का क्या होगा और उनका भविष्य कैसा होगा? क्या सरकार उनके पैसे दिलवा कर उन्हें सऊदी अरब में पुनर्स्थापित करा पाएगी या उनके अनिश्चित भविष्य को देखते हुए आजीविका चलाने के लिए भारत में ही उनके रोजगार की व्यवस्था की जाएगी? अगर हां, तो इतने कम वक्त में इतने लोगों को कैसे रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा?
’विवेकानंद वी ‘विमर्या’, देवघर

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App