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चौपालः दर्द के बल

आम जनता को शायद सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों में बहुत अधिक अंतर बेशक न दिखे पर इन्हें मिलने वाले वेतन और सुविधाओं में काफी ज्यादा फर्क होता है।

Author January 14, 2017 2:40 AM
(Express Photo)

आम जनता को शायद सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों में बहुत अधिक अंतर बेशक न दिखे पर इन्हें मिलने वाले वेतन और सुविधाओं में काफी ज्यादा फर्क होता है। हाल ही में सोशल मीडिया में वायरल हुए बीएसएफ के एक जवान तेजबहादुर के वीडियो से अर्धसैनिक बलों में घटिया खानपान और लचर सुविधाओं का मुद्दा सुर्खियों में जरूर आया है लेकिन इन मुद्दों की सुगबुगाहट काफी लंबे अरसे से है। अक्सर अनुशासन के नाम पर इन बलों के भीतर की बदसूरत हकीकत सामने नहीं आ पाती या आने नहीं दी जाती। बहरहाल, अब जब यह सच्चाई सामने आ ही गई है तो सुरक्षा बलों के हालात में सुधारात्मक परिवर्तन अपरिहार्य हो गया है।

देश की सीमा पर मुस्तैदी से दिन-रात तैनात अर्धसैनिक बलों के जवानों को मिलने वाले दोयम दर्जे के खाने को देख आम आदमी को पीड़ा जरूर हुई है पर समस्या इससे कहीं ज्यादा बड़ी है। छुट्टियों की कमी, असुरक्षित माहौल, अधिकारियों का दुर्व्यवहार, पद के अनुसार कार्य न मिलना, कम वेतन, पेंशन आदि और बहुत-से कारण हैं जो इन जवानों को तनाव से भर देते हैं। इसी बढ़ते तनाव के कारण आए दिन जवानों द्वारा अधिकारियों से मार-पीट या गोलीबारी करने की खबरें अखबारों की सुर्खियां बनती रहती हैं।

सेना की तुलना में कम सुविधाओं और वेतन के चलते हर वर्ष भारी संख्या में अर्धसैनिक बलों के जवान नौकरी छोड़ देते हैं। विपरीत परिस्थितियों में काम करने और परिवार से दूर रहने का दबाव उन्हें कोई अन्य बेहतर विकल्प तलाशने पर मजबूर कर देता है। हालिया राजनीति में सेना और अर्धसैनिक बलों के नाम पर लोगों को भावुक करने की राजनीति अपने चरम पर है पर इन जवानों की समस्याओं का हल खोजने का प्रयास किसी स्तर पर होता नहीं दिख रहा।
देशभक्ति सिर्फ सोशल साइट्स और राजनीतिक मंचों पर चीख कर नहीं होती बल्कि उसके लिए नीतिगत और व्यावहारिक स्तर पर कदम उठाने पड़ते हैं। अर्धसैनिक बलों के लिए सम्मानजनक वेतन और सुविधाओं की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी सरकार की है। जनता सरकार से सकारात्मक पहल की उम्मीद कर रही है और सरकार को भी अपनी साख बचाने के लिए जुमलेबाजी छोड़ कर जमीनी कदम उठाने होंगे।
’अश्वनी राघव, उत्तम नगर, नई दिल्ली

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