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चौपालः स्वर्ग का हाल

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर का सबसे बड़ा शहर श्रीनगर है जो जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी भी है और अपनी विशिष्टताओं के कारण देशी-विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।

Author September 23, 2016 02:51 am

धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर का सबसे बड़ा शहर श्रीनगर है जो जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी भी है और अपनी विशिष्टताओं के कारण देशी-विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। अनेक संस्कृतियों का संगम बना यह शहर एक खूबसूरत पर्यटन स्थल भी है। इस शहर की खासियत विशाल डल झील, झरने और मुगल शासकों द्वारा बनवाए गए उद्यान हैं, जो चौथी और पांचवीं सदी की खूबसूरती को भी प्रस्तुत करते हैं। ‘राजतरंगिनी’ के लेखक कल्हण का कहना है कि ‘श्रीनगरी’ की स्थापना महाराजा अशोक ने तीसरी सदी में की थी। कश्मीर के हृदय में बसा श्रीनगर कस्बा दरिया झेलम के दोनों किनारों पर फैला हुआ है। डल जैसी विश्व प्रसिद्ध झील श्रीनगर की जान है। अपने लुभावने मौसम के कारण श्रीनगर पर्यटकों को सारा वर्ष आकर्षित करता रहता है। लेकिन अभी जो हालात घाटी के हैं वे यहां के पर्यटन को बहुत पीछे ले जा रहे हैं।

कश्मीर घाटी में आतंकवाद से पर्यटन उद्योग पूरी तरह चौपट हो रहा है। पर्यटन से यहां के लोगों को रोजी-रोटी मिलती है, लेकिन इन हालात में लोग खाने को मोहताज हो रहे हैं। पर्यटन उद्योग को दिखने वाली आशा की किरण भी ऐसे माहौल के साथ धुंधली पड़ गई क्योंकि कुछ अलगाववादियों ने ऐसा माहौल बनाया और युवाओं से पत्थरबाजी कराई कि पर्यटकों ने खौफ के चलते घाटी से एकदम मुंह फेर लिया। यह माहौल उन तमाम बुकिंगों को लील गया जो देशभर के पर्यटकों ने कराई थीं। नतीजतन, घाटी में फिर वीरानी छाने लगी है। आज यह एक कड़वी सच्चाई है कि कश्मीर को शेष विश्व से मिलाने वाला एकमात्र राष्ट्रीय राजमार्ग असुरक्षित मार्ग की सूची में शामिल हो गया है। यह अब इस पर सफर करने वालों के लिए ‘लाइफलाइन’ नहीं बल्कि ‘डेथलाइन’ बन चुका है।

जम्मू कश्मीर की अर्थव्यवस्था को 2015 की बाढ़ से पांच हजार करोड़ का नुकसान हुआ था और पर्यटन उद्योग भी पूरी तरह धराशायी हो गया था। फिर धीरे-धीरे जैसे हालात संभलने लगे, पाकिस्तान और अलगाववादियों की नीयत में जहर घुलने लगा। उन्होंने दुर्दांत और इनामी आतंकवादी बुरहान वानी की सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मौत की आड़ लेकर कश्मीर के खुशनुमा माहौल में पत्थरबाजी और खूनखराबे की दहशत भर दी है। पिछले तकरीबन दो महीने से जारी इस माहौल के कारण कश्मीर के पर्यटन उद्योग को छह हजार करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हो चुका है और यह नुकसान जारी है। अगर यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब मुल्क के इस स्वर्ग की बस यादें लोगों के जेहन में बसी रह जाएंगी।
’संतोष कुमार, बाबा फरीद कॉलेज, बठिंडा

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