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चौपालः हादसे के जिम्मेवार

मध्यप्रदेश के इंदौर में रानीपुरा स्थित एक पटाखा हाऊस में भयावह विस्फोट से लगी आग में सात लोग जीवित जल गए थे और कई लोग घायल हुए।
Author October 13, 2017 01:43 am
(File Pic)

मध्यप्रदेश के इंदौर में रानीपुरा स्थित एक पटाखा हाऊस में भयावह विस्फोट से लगी आग में सात लोग जीवित जल गए थे और कई लोग घायल हुए। हादसे के बाद प्रशासनिक जांच में जो भी तथ्य सामने आए, उस जांच रिपोर्ट का हश्र जगजाहिर है। दरअसल, हम शायद हर बार नए हादसों का इंतजार करते रहते हैं। पहले भी इंदौर के राऊ क्षेत्र में पटाखों में विस्फोट होने से जान-माल की क्षति हुई, लेकिन उससे कोई सबक नहीं लिया गया। आश्चर्य की बात तो यह भी है कि राऊ में हुए हादसे की जांच रिपोर्ट ही गायब होने की खबर आई। फिर कैसे उम्मीद करें कि निवारक कदम उठाए भी गए या नहीं! होता यही है कि हर घटना के कुछ समय बाद शासन-प्रशासन बेखबरी की नींद सो जाता है! यह सिर्फ किसी एक क्षेत्र की बात नहीं है। कमोबेश सभी जगह इसी स्तर की लापरवाही बरती जा रही है।

अभी दीप पर्व नजदीक है और रिहाइशी क्षेत्रों में पटाखों का भंडारण और विक्रय किया जा रहा है। व्यापारी-व्यवसायी के अपने स्वार्थपूर्ण हित रहते हैं, जिसका खमियाजा आम जन को भुगतना पड़ता है। विस्फोटक पदार्थ और सामग्री रिहाइशी और व्यावसायिक क्षेत्रों में रखने और भंडारण की अनुमति आखिर क्यों दी जाती है? यों कानून को धता बताना और नियमों का पालन न करना शायद हमारी मानसिकता में समा गया है।
क्षमता से अधिक पटाखे रखने और निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने के लिए दोषी निश्चित रूप से व्यवसायी होते हैं, लेकिन विस्फोटक सामग्री के संचय और व्यवसाय पर शासन-प्रशासन का कठोर नियंत्रण भी आवश्यक है। समय-समय पर अगर निरीक्षण और जांच होती रहे और निर्धारित मापदंडों का पालन करवाया जाता रहे तो हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है। प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक मौकापरस्ती का खमियाजा जनसाधारण को भुगतना पड़ता है। इस लिहाज से देखें तो सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली में पटाखों के मद्देनजर महत्त्वपूर्ण फैसला किया है।

एक अहम प्रश्न यह भी है कि प्रशासन के जिन जिम्मेदार अधिकारियों के जिम्मे निर्धारित मानकों के पालन कराए जाने की जवाबदेही है, हादसों की स्थिति में उनके विरुद्ध क्या आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं किया जाना चाहिए? यह याद रखा जाना चाहिए कि जिम्मेदार शासकीय सेवक ही अगर आपराधिक उदासीनता दिखाएंगे, कर्तव्य पालन से विमुख रहेंगे, भ्रष्टाचार में लिप्त रहेंगे तो भीषण हादसे होते ही रहेंगे। इसलिए समय रहते हादसों से सबक लेते हुए विशेषज्ञों की राय और जांच के परिणामों के आधार पर सुधारात्मक उपाय करते हुए कठोरतापूर्वक निवारक कदम भी उठाए जाएं। उम्मीद की जानी चाहिए कि दिवाली के पहले पटाखों के भंडारण और बिक्री पर समुचित नियंत्रण सुनिश्चित कर जान-माल की हिफाजत के साथ पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त करने की दिशा में गंभीर प्रयास होंगे।
’प्रदीप उपाध्याय, देवास, मप्र

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