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चौपालः कथनी बनाम करनी

हाल में हरियाणा दसवीं बोर्ड के परिणाम घोषित हुए जिसमें सिर्फ 50 फीसद छात्र-छात्राएं पास हुए।

Author June 2, 2017 3:21 AM
परीक्षा परिणाम के बाद राज्य के कई जिलों में छात्राओं ने प्रदर्शन किए कि परीक्षा कॉपी की जांच ठीक से न होने के कारण वे फेल हुई हैं।

हाल में हरियाणा दसवीं बोर्ड के परिणाम घोषित हुए जिसमें सिर्फ 50 फीसद छात्र-छात्राएं पास हुए। परीक्षा परिणाम के बाद राज्य के कई जिलों में छात्राओं ने प्रदर्शन किए कि परीक्षा कॉपी की जांच ठीक से न होने के कारण वे फेल हुई हैं। असल में 50 फीसद छात्रों का परीक्षा में फेल होने दिखाता है कि मुख्य तौर पर यह विफलता छात्रों की नहीं बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की है। अगर हम हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था के हालात पर नजर डालें तो पता चलता है कि मौजूदा समय में सरकारी स्कूलों में 40 हजार अध्यापकों और सहायक-कर्मियों के पद खाली हैं। कैग ने 2014-15 की अपनी रिपोर्ट में 91 स्कूलों का दौरा कर पाया था कि स्कूल में प्रधानाचार्यों, मुख्य अध्यापकों और लेक्चरारों के 37,236 मंजूर पदों की जगह केवल 10,979 पदों पर नियुक्तियां हुई हैं।

कुछ जिलों के सरकारी स्कूलों के आंकड़े देख कर शिक्षा की बदतर हालत की तस्वीर और भी साफ हो जाती है। मुख्यमंत्री सिटी करनाल में 150 स्कूलों में शौचालय तक नहीं हैं। यमुनानगर में सामाजिक विज्ञान, गणित और विज्ञान के 400 अध्यापकों के पद खाली हैं। और तो और, जिले के शेरगढ़ गांव के प्राथमिक स्कूल में एक ही कमरा है जहां 60 बच्चे बैठते हैं। फतेहाबाद जिले में 1,380 शिक्षकों की कमी है और 15 स्कूलों के भवन एकदम जर्जर हालत में हैं। कैथल में 10 स्कूलों के भवनों की हालत खस्ता है और ये एक-एक कमरे में चल रहे हैं। यहां लगभग 1,100 शिक्षकों के पद खाली हैं। इतने बदतर हालात के बाद भी राज्य सरकार बड़े-बड़े विज्ञापनों के जरिए सच्चाई ढंकना चाहती है।

असल में प्रदेश की भाजपा सरकार भी पहले की तमाम सरकारों की तरह शिक्षा को बिकाऊ माल बनाने में जुटी है। निजी स्कूल माफियाओं को सभी प्रमुख पार्टियों का संरक्षण प्राप्त है तभी तो निजी स्कूल प्रबंधक शिक्षा अधिकार कानून 134-ए के तहत गरीब परिवारों के बच्चों के दाखिले के खिलाफ खड़े हैं। ये शिक्षा माफिया हाईकोर्ट के निर्देशों की खुल्लम-खुल्ला धज्जियां उड़ाते हैं और सरकार कान तक नहीं हिलाती। यही नहीं, प्राइवेट शिक्षा माफिया प्रदेश में होने वाली प्रतियोगिताओं के लिए परीक्षा केंद्र न देने की धमकियां दे रहे हैं और इस कानून को लागू कराने में लगे कार्यकताओं पर हमले भी करवाए जाते हैं लेकिन ‘सख्त’ और ‘ईमानदार’ खट्टर सरकार उनकी जी-हुजूरी करने में जुटी हुई है।

आज हरियाणा के 4900 से अधिक प्राइवेट स्कूलों में 28 लाख बच्चे पढ़ते हैं। इस हिसाब से 25 फीसद सीटों की संख्या लगभग 7 लाख बनती है लेकिन इस बार केवल 80 हजार आवेदनों में से महज 25 हजार बच्चों के दाखिले हुए हैं। असल में तो 25 प्रतिशत गरीब परिवारों के बच्चों के दाखिले होने से भी शिक्षा की बुनियादी समस्या हल नहीं होने वाली है लेकिन राज्य सरकार के लिए ऐसे सुधारवादी कानून को लागू करना भी मुमकिन नहीं है। ऐसे में हरियाणा सरकार के नारे ‘कथनी करणी एकै ढाल’ की असलियत हम देख सकते हैं और पाते हैं कि सरकार की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का फर्क है।
’अजय स्वामी, कलायत, कैथल

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