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चौपालः कैसे गोरक्षक

आजकल इतने गोरक्षक हो गए हैं कि पूछो मत। हर गली-नुक्कड़ पर ये खम ठोंकते या अपनी वीरता की पताका फहराते मिल जाएंगे।

Author August 4, 2016 1:25 AM

आजकल इतने गोरक्षक हो गए हैं कि पूछो मत। हर गली-नुक्कड़ पर ये खम ठोंकते या अपनी वीरता की पताका फहराते मिल जाएंगे। लेकिन इनका मकसद गोरक्षा ही है या कुछ और, इसमें संदेह है। गाय अगर माता है तो क्या हम इस माता का ध्यान रख पा रहे हैं? जैसे आजकल बड़ी संख्या में हमारी माताएं ‘ओल्ड ऐज होम’ में रह रही हैं कुछ उसी तरह भूख की मारी और दर-दर भटकती गायें भी अब सड़कों पर आ गई हैं। वे न जाने क्या-क्या अखाद्य खाने पर मजबूर हैं। अगर आपका मकसद गोरक्षा है तो डेरी उद्योग के पास भी गोरक्षकों को जाना चाहिए। वहां भी गायों पर अत्याचार होता है, वहां से भी इन माताओं को बचा कर लाना चाहिए!

आप गोकशी के शक में किसी को मार कर तो गोरक्षा करना चाहते हैं लेकिन जो उद्योग जीते-जी गायों को मार रहे हैं उनसे आपको कोई दिक्कत क्यों नहीं है? चमड़ा कहां से आता है, कौन कर रहा है इसका व्यापार? किसी पशु को मारने के बाद उसका चमड़ा उतारा जाता है जिसके आप जूते-चपल पहनते हैं। अगर आप सच्चे गोरक्षक या गोभक्त हैं तो जल्दी से चमड़े की हर चीज बाहर फेंक दीजिए! गरीब तो बस चमड़े का काम करता है, उसका उपयोग तो आप ही करते हैं। आप क्यों नहीं गाय या अन्य सभी पशुओं के लिए अंतिम संस्कार की विधि निर्धारित कर देते! अगर गाय माता है तो बाकी पशु भी कुछ न कुछ तो लगते ही होंगे! फिर सोच लीजिये, गाय अगर माता है तो बकरी भी कुछ लगती होगी। मौसी की लड़की ही सही! तो हमें अब किसी पशु को नहीं मारने देना चाहिए। क्यों सही कहा न?

चलिये, शुरू हम गोरक्षा करने वालों से करते हैं कि वे अब चमड़े की किसी भी वस्तु का उपयोग नहीं करेंगे। अगर गाय उन्हें कहीं दिखेगी तो उसे अपने घर लाएंगे। डेरी उद्योग में पशुओं पर हो रहे अत्याचार को रोकेंगे। गायों के जीते जी उनकी रक्षा करें जिससे साबित हो आप गोरक्षा ही करना चाहते हैं!
’अभय, दिल्ली

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