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चौपालः कृत्रिम बुद्धिमत्ता

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) की देन स्वचालन (आॅटोमेशन) को आने वाले आर्थिक, सामाजिक परिदृश्य के अग्रदूत के रूप में देखा जा रहा है।
Author October 7, 2017 03:09 am
कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंप्यूटर विज्ञान की एक ऐसी शाखा है, जिसका काम बुद्धिमान मशीन बनाना है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) की देन स्वचालन (आॅटोमेशन) को आने वाले आर्थिक, सामाजिक परिदृश्य के अग्रदूत के रूप में देखा जा रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंप्यूटर विज्ञान की एक ऐसी शाखा है, जिसका काम बुद्धिमान मशीन बनाना है। इसके अंतर्गत मशीनों को इस तरह बनाया जाता है कि वे इंसानों जैसा ही काम कर सकें। और तो और, उनकी तरह प्रतिक्रिया भी कर सकें। इस पद्धति का सीधा-सा मतलब कृत्रिम तरीके से विकसित की गई बुद्धिमत्ता से है। रोबोट सहित इंसान की तरह काम करने वाली सभी मशीनें इस श्रेणी में आती हैं। लेकिन ये अब तक पूरी तरह बुद्धिमान नहीं हो पाई हैं। वास्तव में यह पद्धति कंप्यूटर के प्रोग्रामों को उन्हीं तर्कों के आधार पर चलाने का प्रयास करती है, जिनके आधार पर इंसान का दिमाग चलता है। इसका उद्देश्य कंप्यूटर को इतना कुशल बनाना है कि वह अपनी अगली गतिविधि खुद तय कर सके। अगर हम ब्रिटेन के डिलॉयट और अमेरिका के मेकेंसी की मानें, तो आने वाले दशक में स्वचालन के कारण एक तिहाई या आधी नौकरियां खत्म हो जाएंगी। ऐसी स्थिति में भारत को अपने भविष्य के लिए क्या कदम उठाने चाहिए?

वर्तमान समय में भारत के नब्बे प्रतिशत कर्मचारी अनौपचारिक रूप से संगठित हैं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जन्मी आर्थिक उथल-पुथल का आसानी से शिकार बन सकते हैं। पूर्वी एशिया के देशों में रोबोट के जरिए होने वाली कृषि के सस्ते उत्पाद जब भारत में आने शुरू हो जाएंगे, तब भारत के किसानों की और भी ज्यादा दुर्दशा हो जाएगी। वाहनों के क्षेत्र में पहले ही रोबोट प्रवेश कर चुके हैं। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 40 प्रतिशत नौकरियां काम हो चुकी है।
कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं जिनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता का बेहतर उपयोग हो सकता है। भारत में प्रबंधन और वितरण के क्षेत्र में अनेक समस्याएं हैं। इस क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता मददगार हो सकती है। इस क्षेत्र में पारंपरिक रूप से काम करने वाले सहकारी संगठनों में कर्मचारियों की संख्या को बढ़ाया जा सकेगा। दूसरे, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रयोग की अनिवार्यता से इसके काम जनता की नजर में रहेंगे। इस प्रकार सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां ज्यादा अच्छी तरह काम करेंगी। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारण प्रशासन के ढांचे में सुधार होगा। इसके माध्यम से भ्रष्टाचार और धोखेबाजी को पकड़ा जा सकेगा। शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन के लिए भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता को उपयोग में लाया जा सकता है। कुछ खतरनाक उद्योगों में लगे लोगों को हटा कर कृत्रिम मानव को लगाया जा सकता है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता का वैश्विक बाजार 62.9 फीसद की दर से बढ़ रहा है, जिसके अगले पांच वर्षों में 1100 अरब रुपए होने की पूरी संभावना है। प्रसिद्ध वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग का कहना है कि आज कंप्यूटर और इंसानी दिमाग में ज्यादा फर्क नहीं रह गया है। ऐसे में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का निरंतर विकास हमारी बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। लेकिन अगर इसे नियंत्रण में नहीं रखा गया, तो यह मानव जाति के जैविक विकास की तुलना में आगे निकल जाएगा और मानव जाति पिछड़ जाएगी।
’रजनीश भगत, बिहार विवि, मुजफ्फरपुर

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