Opinion about Student shoots school principal dead in Yamuna Nagar - Jansatta
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चौपालः हिंसा के परिसर

यमुनानगर के नामी स्कूल में बारहवीं कक्षा के छात्र द्वारा दिनदहाड़े महिला प्रिंसिपल की हत्या दुखद व स्तब्धकारी घटना है।

Author January 23, 2018 3:52 AM
प्रिंसिपल ऋतु छाबड़ा की तस्वीर।

यमुनानगर के नामी स्कूल में बारहवीं कक्षा के छात्र द्वारा दिनदहाड़े महिला प्रिंसिपल की हत्या दुखद व स्तब्धकारी घटना है। पिछले कुछ महीनों में गुरुग्राम, लखनऊ, जींद व नोएडा में स्कूली बच्चों में हुई हृदयविदारक घटनाएं साफ संकेत करती हैं कि विद्यार्थियों में आपराधिक प्रवृत्ति अनवरत बढ़ रही है जो यकीनन चिंता का विषय है। सवाल उठना लाजिमी है कि कहीं हमारी शैक्षिक व सामाजिक व्यवस्था या फिर पारिवारिक परवरिश में तो खामियां नहीं हैं? आखिरकार बच्चे इतने उत्तेजित क्यों हो जाते हैं कि पलभर में ही इस हद तक आपा खो बैठते हैं कि अपने कोमल हाथों में शास्त्र की बजाय शस्त्र थाम कर बेचैन कर देने वाली घटना को अंजाम दे डालते हैं!

आजकल सोशल मीडिया, इंटरनेट और नशे ने बच्चों को इस कदर जकड़ रखा है कि उनकी सोचने-समझने की शक्ति कुंठित हो जाती है और वे तनाव का शिकार हो जाते हैं। लिहाजा, शिक्षा के मंदिरों में मनोचिकित्सकों का होना जरूरी है जो बच्चों को इस विकारग्रस्त प्रवृत्ति से उबार सकें। दूसरा, एकल परिवारों के चलन से पारिवारिक सदस्यों में घर कर गई संवादशून्यता का असर बच्चों पर साफ देखा जा सकता है। संयुक्त परिवारों में पहले बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक सब मिलबैठ कर अपने खुशी-गम साझा करते थे। बच्चों को बुजुर्गों के अनुभवों से सीख मिलती थी और साथ ही उनका नैतिक, पारिवारिक व सामाजिक मूल्यों से सरोकार भी हो जाता था। जरूरत है कि रिश्तों की इस टूटती कड़ी को फिर जोड़ा जाए। स्कूली शिक्षार्थी देश के कर्णधार हैं। उन्हें बेहतर इंसान बनाने के लिए चहुं ओर से सम्यक परवरिश बेहद जरूरी है।
’नीरज मानिकटाहला, यमुनानगर, हरियाणा

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