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राजपाटः सेमीफाइनल का खौफ

हाथी के दांत खाने के और होते हैं और दिखाने के और। भाजपा भी ऐसे दोहरे रवैये से मुक्त नहीं है।

Author January 13, 2018 1:18 AM
इस तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

हाथी के दांत खाने के और होते हैं और दिखाने के और। भाजपा भी ऐसे दोहरे रवैये से मुक्त नहीं है। वह दावा तो जाति और संप्रदाय मुक्त राजनीति का करती है पर हर फैसला इन्हीं दो कसौटियों पर लेती है। जातिवाद को सामाजिक समरसता का जामा पहना कर। राजस्थान में फिर साबित कर दी उसने अपनी मानसिकता। लोकसभा की दो और विधानसभा की इकलौती सीट के उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की मेरिट उनकी जाति ही रही पार्टी के लिए। दरअसल सूबे में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होना है। लिहाजा इन तीन सीटों के उपचुनाव को भाजपा और कांग्रेस दोनों ही चुनाव का सेमीफाइनल मान कर चल रहे हैं। तीनों सीटों पर पिछली दफा भाजपा ही जीती थी। लिहाजा बड़ी चुनौती भी उसी के सामने है। अपनी तीनों सीटों को बचाना।

इस नजरिए से कांग्रेस की स्थिति थोड़ी सुरक्षित है। उसके पास खोने को कुछ है ही नहीं। जो भी पा जाएगी, उसी पर इठलाएगी। भाजपा ने अलवर से सूबे के श्रममंत्री जसवंत यादव को तो अजमेर से दिवंगत सांसद सांवरलाल जाट के बेटे राम स्वरूप को उम्मीदवार बनाया है। इससे दूसरे दावेदारों में हताशा है। ये दोनों दो महीने पहले ही कर चुके थे अपनी उम्मीदवारी का दावा। फिर क्यों करती रही पार्टी उम्मीदवार के चयन की मशक्कत।

उम्मीदवारों को कमजोर मान इन सीटों के भाजपा विधायक डर गए हैं। लोकसभा उपचुनाव हारने की गाज उनके विधानसभा टिकट पर भी गिर सकती है। अलवर से उम्मीदवार बनाए गए जसवंत यादव से जिले का एक भी भाजपा विधायक खुश नहीं है। कांग्रेस ने अलवर में डॉक्टर करण सिंह यादव पर दाव लगाया है। जमीनी कार्यकर्ता यही आरोप लगा रहे हैं कि आलाकमान को अंधेरे में रख कर तय कर दिए सूबे के पार्टी संगठन ने तीनों उम्मीदवार।

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