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चौपालः लंबी लड़ाई

पिछले दिनों बलात्कार की दो जघन्य घटनाएं सामने आर्इं। जम्मू-कश्मीर में आठ साल की बच्ची के साथ छह लोगों ने सात दिन तक बलात्कार किया और बाद में उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने भी इस काम में उनका साथ दिया।

Author April 14, 2018 01:57 am

पिछले दिनों बलात्कार की दो जघन्य घटनाएं सामने आर्इं। जम्मू-कश्मीर में आठ साल की बच्ची के साथ छह लोगों ने सात दिन तक बलात्कार किया और बाद में उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने भी इस काम में उनका साथ दिया। उत्तर प्रदेश के उन्नाव में भाजपा विधायक और उसके साथियों ने एक महिला का सामूहिक बलात्कार किया व विरोध प्रदर्शन करने पर उसके पिता को पीट-पीटकर मार डाला। पीड़िता के पिता को मारने में पुलिस भी साथ में थी। इन घटनाओं को सुन कर कोई भी इंसाफ पसंद और मानवतावादी व्यक्ति दहल जाएगा और इनके लिए इंसाफ मांगेगा लेकिन आज देश में कुछ लोग ऐसे पैदा हो गए हैं जो बलात्कारियों के समर्थन में रैलियां तक करने लगे हैं। इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ योगी सरकार 2011 में दर्ज बलात्कार मामले को वापस लेने जा रही है।

इन सभी घटनाओं से साफ हो जाता है कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, ‘बहुत हुआ नारी पर वार, अब की बार मोदी सरकार’ जैसे नारे देने वाली केंद्र सरकार के ‘अच्छे दिन वाले राज’ में औरतों के लिए कोई जगह नहीं है। भाजपा और आरएसएस के महिला विरोधी चरित्र को दिखाने के लिए एक ही तथ्य पर्याप्त है और वह यह कि इन दोनों घटनाओं में वे बलात्कारी के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। शायद भारत के इतिहास में यह पहली घटना होगी जब कोई संगठन बलात्कारी को सजा दिलाने के लिए नहीं, बल्कि बचाने के लिए प्रदर्शन कर रहा है।
पिछले कुछ समय से भाजपा एक ऐसी पार्टी के रूप में उभरी है जिसमें सभी दलों के आपराधिक तत्त्व शरण प्राप्त कर रहे हैं। इस देश के प्रधान सेवक ने हाल ही में सीना फुलाते हुए कहा था कि कमल का फूल पूरे देश में फैल रहा है, लेकिन वे यह बताना भूल गए कि दरअसल यह फूल औरतों, दलितों, अल्पसंख्यकों और मजदूरों के खून से सींचा जा रहा है। एक तरफ भयंकर बेरोजगारी और दूसरी तरफ ऐसी घटनाएं दिखाती हैं कि पूरे देश में फासीवाद का अंधेरा गहराता जा रहा है। गोरक्षा, लव-जिहाद, भारत माता की जय या राम मंदिर की राजनीति सिर्फ और सिर्फ आम जनता को बांटने और आपस में लड़ाने के लिए खेली जाती है।

भारत माता की रक्षा करने का दम भरते हुए ये फासीवादी उन्माद मचाते हुए देश की असली माताओं-बहनों के साथ बदसलूकी कर रहे हैं। उनकी देश की परिभाषा बस कागज पर बना एक नक्शा है। बढ़ते निरंकुश स्त्री-विरोधी अपराधों से यह जाहिर हो जाता है कि इनकी देश की परिभाषा में महिलाओं के लिए स्थान सिर्फ और सिर्फ एक भोग्य वस्तु का है। पूंजीवादी व्यवस्था और पितृसत्ता के चलते हमारा समाज जिस स्त्री-विरोधी मानसिकता से ग्रसित है उसके कारण फासीवाद के इस दौर में स्त्रियों पर हमले और भी बर्बर, और भी निर्मम होते जा रहे हैं। ऐसे में देश में बढ़ रहे स्त्री विरोधी अपराधों और दमितों के अधिकारों पर हो रहे फासीवादी हमलों के खिलाफ एकजुट होना होगा! लड़ाई लंबी है और हम अभी लड़ना शुरू नहीं करेंगे तो बहुत देर हो जाएगी।
’योगेश स्वामी, मुकुंद विहार, दिल्ली

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