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चौपालः नए साल में

हर नया वर्ष हमारे लिए उम्मीदों, आशाओं, उमंगों का पिटारा लेकर आता है और हम पुराने वर्ष का आकलन करते हैं कि उसमें क्या खोया और क्या पाया।

Author January 2, 2018 2:32 AM

हर नया वर्ष हमारे लिए उम्मीदों, आशाओं, उमंगों का पिटारा लेकर आता है और हम पुराने वर्ष का आकलन करते हैं कि उसमें क्या खोया और क्या पाया। कुछ खट्टी तो कुछ मीठी यादों को लेकर पिछला वर्ष अतीत बन जाता है और हम अतीत को याद करते हुए, उससे कुछ न कुछ सीखते हुए, कुछ प्रेरणा लेते हुए आगे बढ़ते हैं। जीवन चक्र बस यों ही समय के फेर के साथ चलता है। कड़वी हकीकत यह भी है कि हर साल हम कुछ नया करने की सोचते जरूर हैं लेकिन समय के साथ करना भूल जाते हैं और फिर वहीं आकर खड़े हो जाते हैं जहां से चले थे। हमें पढ़ाई, करियर, घर-परिवार की जिम्मेदारी, बच्चों के पालन-पोषण, समाज के रीति-रिवाजों, रिश्तों के निर्वाह और अन्य तमाम चिंताएं लगी रहती हैं। यह स्वाभाविक भी है और हम सब इन सब में गुम हो जाते हैं। अपनी मर्जी से चलने का सुख हर किसी को असीम संतोष व सुकून देता है। लेकिन अपनी गलत सोच में, गलत आदतों में बदलाव आवश्यक है।

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नए वर्ष में कई संकल्प लेने का आह्वान होता है मगर जनवरी गुजरते-गुजरते नए साल का जोश ठंड के आगोश में दुबक जाता है। अगर जीवन को बेहतर बनाना है तो स्वयं में कुछ बदलाव लाने होंगे, जो बेहतर भविष्य की नींव बनेंगे। परिवर्तन बहुत जरूरी है और हम परिवर्तन के साथ स्वयं भी जिएं और दूसरों को भी जीने दें। दूसरों के लिए भी कुछ करें। नए वर्ष में हमें चाहिए कि सपने देखें और उन्हें साकार करने का प्रयास करें। मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता। नशा नहीं करें। लगातार अपनी सामर्थ्य को मेहनत व लगन से बढ़ाने का प्रयास करें। कुछ नया व अच्छा करने का प्रयास करें।

मानवताविहीन न हों। नई सोच विकसित करें। सकारात्मक मानसिकता से अच्छी चीजों को ग्रहण करें। जीवन में सकारात्मकता बहुत जरूरी है। विफलताओं पर निराश होने की बजाए उपलब्धियों पर संतोष करना सीखें। अपनी कमजोरियों व गलतियों को उदारता से स्वीकार कर आत्ममंथन कर उन्हें सुधारें।
यदि इन बातों को जेहन में रखते हुए हम नए साल में काम करेंगे तो न केवल हमारा जीवन बेहतर होगा बल्कि हमारा देश भी तरक्की करेगा।
’धार्विक नमन, शौर्य, डिब्रूगढ, असम

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