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चौपालः असुविधा की सवारी

दिल्ली मेट्रो की मजेंटा लाइन पर ट्रायल के दौरान दीवार से टकराने से मेट्रो के कोच समेत बाकी कई चीजों का भी नुकसान हुआ है।

Author December 21, 2017 02:27 am
दिल्ली में कालिंदी कुंज के पास मंगलवार को मेट्रो हादसे का शिकार हुई। ट्रेन दीवार तोड़कर कुछ तरह क्षतिग्रस्त हुई। (फोटोःएएनआई)

दिल्ली मेट्रो की मजेंटा लाइन पर ट्रायल के दौरान दीवार से टकराने से मेट्रो के कोच समेत बाकी कई चीजों का भी नुकसान हुआ है। इससे एक बात साफ होती है कि हर समय सचेत रहना जरूरी है और जो भी प्रोटोकॉल रहते हैं उनका ध्यान से पालन करना बहुत ही आवश्यक होता है। लापरवाही या असावधानी से नई मेट्रो सेवा शुरू होने से पहले ही उसे नुकसान हुआ है। किसी भी सार्वजनिक सेवा के लिए जो राशि निवेश की जाती है, उससे जनता को फायदा होने से ही निवेश राशि की वापसी कम समय में होती है।

इस कारण उस राशि का उपयोग जनता को और नई सुविधाए प्रदान करने में किया जा सकता है। लेकिन जब शुरू में ही नुकसान का सामना करना पड़ता है तो नुकसान के नाम से नया वित्तीय बोज बढ़ता है। सार्वजनिक सेवा मिलने के लिए जनता को लंबे समय का इंतजार करना पड़ता है और ऐसे में सावधानी नहीं बरतने से नुकसान हो तो वह सेवा मिलने में और देर लग जाती है। नुकसान को सिर्फ पैसों में ही नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि सबसे ज्यादा नुकसान विश्वसनीयता का हुअ है।

दिल्ली में प्रदूषण की समस्या गंभीर है। ऐसे में कम से कम गाड़ियों का उपयोग होना चाहिए। उसके लिए राजधानी के लोगों के लिए मेट्रो ही आशा का किरण है। लोगों को मेट्रो जैसी सुविधा मिलेगी तो उनके पास यात्रा के लिए विकल्प रह सकता है और प्रदूषण पर भी नियंत्रण रखने के लिए उनसे कोशिश हो सकती है। उसके लिए मेट्रो की यात्रा सुरक्षित करने पर ध्यान दिया जाए। लेकिन हाल में इसके किरायों में जिस तरह बेलगाम बढ़ोतरी की गई है, क्या वह रोजाना सफर करने वालों को अपने से दूर नहीं करेगा? हाल ही में खबर आई थी कि मेट्रो में बढ़े किराए की वजह से रोजाना करीब तीन लाख लोगों ने सफर करना छोड़ दिया है।
’वैजयंती सूर्यवंशी, पालघर, महाराष्ट्र

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