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चौपालः दोगली राजनीति

आज दलित भारतीय राजनीति की धुरी बन गए हैं। हर छुटभैये नेता से लेकर बड़े नेताओं तक का दलित प्रेम देखते ही बनता है।

Author April 7, 2018 04:43 am
सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण कानून में कुछ बदलाव करने की खबर आते ही राहुल गांधी ‘दलित-विरोधी सरकार’ की तख्ती लिए हंगामा करते नजर आए।

आज दलित भारतीय राजनीति की धुरी बन गए हैं। हर छुटभैये नेता से लेकर बड़े नेताओं तक का दलित प्रेम देखते ही बनता है। राजनीतिक पार्टियों के तो क्या कहने हैं! कांग्रेस, जिसने इस देश पर आजादी से अब तक सबसे ज्यादा समय शासन किया, में दलित प्रेम इतना अधिक है कि उसने दलितों को आज तक दलित ही बनाए रखा। शायद इसी एजेंडे के तहत कांग्रेस ने अपने शासन काल में दलितों के लिए संविधान-प्रदत्त आरक्षण लागू नहीं किया और न दलितों के मसीहा व संविधान-निर्माता बाबा साहब आंबेडकर को भारतरत्न के योग्य समझा। लेकिन अभी सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण कानून में कुछ बदलाव करने की खबर आते ही राहुल गांधी ‘दलित-विरोधी सरकार’ की तख्ती लिए हंगामा करते नजर आए और फिर ट्वीट पर ट्वीट किए। अन्य नेतागण व राजनीतिक पार्टियां, जो दलितों के नाम पर अरबों-खरबों के मालिक-मालकिन बन बैठे हैं, भी तड़ातड़ बयान दागने लगे और अपने समर्थकों के साथ धरना-प्रदर्शन पर उतर आए। इन समर्थकों को बताया गया कि- सरकार आरक्षण खत्म करने जा रही है, जो कई अखबारों में छपा है। इस पर प्रदर्शन उग्र होना ही था, जिसके कारण बारह बेकसूर लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी और करोड़ों की संपत्ति खाक हो गई।

छाती ठोक कर स्वयं को बाबा साहब की अनुयायी बताने वाली राज्य सरकारों को जब होश आया, तब तक आम जनता का बहुत कुछ खो चुका था। उपद्रवियों की धड़-पकड़ हुई, लेकिन इन्हें भी वोट-बैंक की खातिर, जाट-आंदोलनकारियों या करणी सेना के लोगों की तरह आराम से छोड़ दिया जाएगा। ऐसे आंदोलनों में संपत्ति के नुकसान पर किसी भी पार्टी को करदाताओं की चिंता बिलकुल नहीं होती जैसे अन्य मामलों में ये छाती-कूटते नजर आते हैं। इस सबके साथ इन पार्टियों का दोहरा चेहरा भी हास्यास्पद लगता है। जैसे कुछ पार्टियों को राम जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट पर ही विश्वास है लेकिन उनके मुताबिक एससी /एसटी एक्ट में बदलाव करने वाला सुप्रीम कोर्ट कौन होता है!

तीन तलाक मामले में इन्हें तलाक की शिकायत पर पुरुषों की तुरंत गिरफ्तारी पर सख्त आपत्ति है कि उसका घर कैसे चलेगा, लेकिन एससी/ एसटी एक्ट के मामले में उन्हें शिकायत के साथ ही गिरफ्तारी चाहिए! इस एक्ट में ये पुरातन सामंती सोच के सख्त खिलाफ हैं और सबको होना भी चाहिए, लेकिन तीन तलाक के मामले में पुरुषवादी सामंती सोच के पैरवीकार बन जाते हैं। यानी इधर हो या उधर, हर हाल में इनका वोट बैंक पक्का होना चाहिए चाहे पूरा देश आग के हवाले हो जाए!
’संजय सिंह, ईस्ट आॅफ कैलाश, दिल्ली

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