ताज़ा खबर
 

चौपालः जैसे को तैसा

जनवरी 2016 में चीन में ग्लोबल टाइम्स अखबार ने एक सर्वे किया था जिसमें दो सवाल पूछे गए थे।
Author August 4, 2017 02:54 am
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फाइल फोटो)

जनवरी 2016 में चीन में ग्लोबल टाइम्स अखबार ने एक सर्वे किया था जिसमें दो सवाल पूछे गए थे। पहला,आपका पड़ोसी देश किस तरह का होना चाहिए? दूसरा सवाल था कि किस देश को आप अपने साथ नहीं रखना चाहते और किसे साथ रखना चाहते हैं? जान कर हैरानी होगी कि भारत को इसमें 10416 लोगों ने नापसंद देश माना जबकि इस सर्वे में 20000 लोगों ने हिस्सा लिया था। इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि आधे से ज्यादा चीनियों ने भारत को ठुकरा दिया जबकि पाकिस्तान को चीन में भारत से ज्यादा पसंद किया गया।
भारत ने अपने 5000 हजार साल के इतिहास में किसी भी देश पर हमला नहीं किया। ताकतवर और संपन्न होने के बाद भी किसी को दबाया नहीं। अगर हम 1947 से लेकर आज तक का इतिहास उठा कर देखें तो भारत ने हमेशा शांति और सिद्धांतों की न केवल बात की है बल्कि उसे अपने व्यवहार से भी साबित किया है। 1948 में पाकिस्तान ने कश्मीर के एक बड़े हिस्से (पीओके) पर जबरन कब्जा कर लिया था और उसका एक भाग 1963 में चीन को दे दिया था जो आज अक्साईचिन के नाम से जाना जाता है।

चीन 1937 (जब झिनझियांग और तिब्बत उसका हिस्सा नहीं थे) में क्या था और आज क्या है! उधर भारत की भौगोलिक स्थिति भी आज सबके सामने है। कश्मीर के भारत का अभिन्न अंग होने की बात हर बार हर तरह से हरेक नेता ने दोहराई है लेकिन असल में कश्मीर किसके पास है यह सब जानते हैं। पाकिस्तान ने हम पर चार बार हमला किया और हर हमले में हमने उसे मुंहतोड़ जवाब दिया लेकिन हर जीत से हमें मिला क्या कुछ नहीं। कश्मीर के लिए उसने हमें युद्ध में झोंका लेकिन हमने क्या किया? कुछ नहीं। जीत के बाद भी हम उससे गुलाम कश्मीर तक नहीं ले पाए। उसका आर्थिक पक्ष मजबूत नहीं है, वह सेना में और ताकत में हमारे सामने कहीं नहीं ठहरता। फिर भी वह कश्मीर के एक बड़े हिस्से पर कब्जा किए बैठा है और पूरा कश्मीर लेने के लिए हमारे साथ चार युद्ध लड़ चुका है।

तुलसीदासजी ने कहा था, ‘समरथ को नहीं दोष गोसार्इं’। यह बात आज भी उतना ही मूल्य रखती है जितना आज से 500 साल पहले। कोरे सिद्धांतों से देश नहीं चला करते। चीन और अमेरिका का उदाहरण हमारे सामने है। शांति का ठेका केवल भारत ने नहीं ले रखा है। अगर पाकिस्तान परमाणु संपन्न देश है तो हम भी हैं, यह याद रखना चाहिए। कहते हैं, शांति के लिए भी युद्ध आवश्यक है। लगभग साठ वर्षों से हम पाकिस्तान के साथ शांति के कबूतर उड़ा रहे हैं पर मिला कुछ नहीं।
कभी राष्ट्र के रूप खड़ा तिब्बत आज चीन के कब्जे है। किसी देश ने उसकी मदद नहीं की। आज दुनिया के नक्शे से वह खत्म हो चुका है। इसलिए हमें अपने हक के लिए खड़ा होना पड़ेगा और उसके लिए लड़ना भी पड़ेगा। हमें समझना होगा कि साधु का अपना धर्म होता है और राजा का अपना। अगर दोनों अपना धर्म नहीं निभाएंगे तो न वह साधु बचेगा और न ही राजा। आज हम तिब्बत को भी देख सकते हैं और इजराइल को भी। इजराइल जैसे देश से सबक लेकर एक मिसाल कायम करनी चाहिए कि अगर भारत और भारतीयों को छेड़ा तो भारत छोड़ेगा नहीं।
’रवि प्रताप सिंह, नई दिल्ली

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.