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चौपालः घोटाले के पीछे

पंजाब नेशनल बैंक में हुए घोटाले से बैंकिंग प्रणाली को गहरा झटका लगा है।

Author March 15, 2018 3:08 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर

पंजाब नेशनल बैंक में हुए घोटाले से बैंकिंग प्रणाली को गहरा झटका लगा है। पिछले साल विजय माल्या का 9000 करोड़ का घोटाला, इस साल 11400 करोड़ का घोटाला और इसी बीच विक्रम कोठारी द्वारा 3000 करोड़ से अधिक के घोटाले ने बैंकिंग प्रणाली को एक बार फिर संदेह के घेरे में ला दिया है। इन घोटालों की वजह से बैंकों का एनपीए लगातार बढ़ता जा रहा है जो इस समय लगभग 9.48 लाख करोड़ हो चुका है।

एक तरफ जहां आम व्यक्ति को बैंक से कर्ज लेने के लिए हर प्रक्रिया से गुजरने के बाद भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है और किसी कारणवश कर्ज चुकाने में देरी हो गई तो बैंकिंग तंत्र का कोपभाजन होना पड़ता है। कभी-कभी तो जेल की हवा भी खानी पड़ती है। तब लगता है जैसे देश की बैंक व्यवस्था एकदम सुरक्षित है। लेकिन वहीं दूसरी तरफ देश के उद्योगपतियों को बैंकों द्वारा कर्ज की इतनी बड़ी-बड़ी रकम इतनी आसानी से मुहैया हो जाना और कर्ज की रकम न चुकाने पर इनका विदेश भाग जाना बैंकिंग प्रणाली को कठघरे में खड़ा कर देता है।

ऐसा नहीं है कि ऐसी घटना रोकने के लिए कोई नियम नहीं थे। नियम तो कई थे लेकिन उनका पालन नहीं किया गया या कहें कि जिन लोगों पर नियम पालन करने और कराने की जिम्मेदारी थी वही भ्रष्ट बन गए। इन घटनाओं में बैंकों के आला अफसरों और कर्मचारियों की मिलीभगत रही है, जिन्होंने बैंकिंग प्रणाली के नियम और कानून को ठेंगा दिखा कर उद्योगपतियों की मदद की और उनके तंत्र को पूरी तरह खोखला कर दिया।

सरकार को बैंकिंग प्रणाली में बदलाव करने की सख्त जरूरत है। उद्योगपतियों को बैंकों द्वारा कर्ज देने की जांच प्रक्रिया और कड़ी की जानी चाहिए और अगर किसी उद्योगपति का कर्ज के लेन-देन का रिकार्ड स्वच्छ न हो तो उसे फिर बैंकों से कर्ज न दिया जाए। कर्ज देने से पहले उनकी गिरवी रखी गई संपत्ति की पूरी जांच के बाद ही उस संपत्ति की कीमत के बराबर ही कर्ज दिया जाए, उससे ज्यादा बिल्कुल नहीं ताकि बैंक का पैसा डूबने की स्थिति में उस संपत्ति को बेच कर बैंक अपना पैसा वसूल कर सकें। अंतरराष्ट्रीय स्तर का लेन-देन, जो बड़े पैमाने पर होता है, उसकी मंजूरी सिर्फ बैंक के उच्च अधिकारियों के पास ही हो।
’शुभम शर्मा, गोरखपुर

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